शस्त्र लाइसेंस का नवीनीकरण शुरू है लेकिन शस्त्र धारकों को रेन्युवल कराने में कई पापड़ बेलने पड़ रहे हैं। अनुसूचित जाति के व्यक्ति या किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी के साथ बदसलूकी भी लाइसेंस नवीनीकरण में अड़ंगा बन सकती है।
हर तीन वर्षों में शस्त्रधारकों को लाइसेंस का नवीनीकरण कराना होता है। इस समय कलेक्ट्रेट में शस्त्र धारक नजर आ रहे हैं। नवीनीकरण के लिए उनके आवेदन प्राप्त होते ही प्रभारी अधिकारी शस्त्र कार्यालय से संबंधित पुलिस उपाधीक्षक को पत्र भेजकर आवेदक शस्त्र धारक के संबंध में आठ सूचनाएं मांगी जा रही है।
इसके तहत आवेदक का फील्ड वर्कर, कर्मचारी या अधिकारी के साथ व्यवहार कैसा है? किसी दलित का उत्पीड़न तो नहीं किया है? क्षेत्र मेें आवेदक की आम शोहरत कैसी है? इनके अतिरिक्त आपराधिक मुकदमा, गांव की सुरक्षा समिति में सक्रिय योगदान आदि के बाबत भी पुलिस से रिपोर्ट मांगी गई है। यह रिपोर्ट सकारात्मक आने पर ही नवीनीकरण की फाइल आगे बढ़ती है।
उधर, नवीनीकरण के लिए लाइसेंस धारक को औपचारिकताएं पूरी करने और सरकारी शुल्क जमा करने के अलावा कलेक्ट्रेट से लेकर थाना और तहसील तक संबंधित बाबुओं और मुशिंयों की मुट्ठी भी गर्म करना पड़ती है। हालांकि नगर मजिस्ट्रेट केएस पांडेय का कहना है कि लाइसेंस नवीनीकरण में ऐसी शिकायत नहीं मिली है। ऐसा हुआ तो दोषी पर कार्रवाई की जाएगी।