बांदा। बेहतर सुरक्षा का सर्वोत्तम अवार्ड पाने वाली बांदा जेल बंदी के भागने के सवाल पर खुद ही कटघरे में खड़ी हो गया है। आठ घंटे बाद बंदी के भागने की सूचना पुलिस को दी गई। तब तक बंदी काफी दूर निकल गया। ऐसे में उसे पकड़ने के सभी रास्ते बंद हो गए। 48 घंटे बाद भी बंदी का कोई सुराग नहीं लग सका। अधिकारियों ने लापरवाही का सारा ठीकरा बंदी वार्डर पर फोड़ अपने को बचा लिया।
कमासिन थाना क्षेत्र के ममसीखुर्द निवासी बंदी बच्छराज गुरुवार की शाम 5 बजे जेल कर्मियों को चकमा देकर फरार हो गया था। जेल प्रशासन ने ठीक आठ घंटे बाद रात्रि एक बजे कोतवाली पुलिस को सूचना दी। समय पर पुलिस को सूचना दी जाती तो शायद पुलिस नाकेबंदी कर बंदी को दबोच लेती। लेकिन अधिकारी इस मामले को दबाएं रहे। दूसरे दिन यहां आए डीआईजी जेल ने लापरवाही के लिए जेल वार्डर सत्येंद्र को दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया।
उधर, 48 घंटे बाद भी बंदी का कोई सुराग नहीं लग सका। हालांकि जेल व सिविल पुलिस दोनों बंदी की तलाश में छापेमारी कर रही है। कारागार अधीक्षक आरके सिंह का कहना है कि बंदी की तलाश में दो टीमें लगी हुई है। जल्द वह पकड़ा जाएगा। कोतवाली प्रभारी दिनेश सिंह का कहना है कि बंदी के बहन, बुआ आदि के घरों में दबिश दी गई लेकिन वह नहीं मिला।