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जनप्रतिनिधि नहीं बन पा रहे मरीजों के दर्द का %मरहम’

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मेडिकल कालेज का वाह्य रोग विभाग। - फोटो : BANDA
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बांदा। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को सेहतमंद बनाने में जनप्रतिनिधि अहम भूमिका नहीं निभा रहे। यदा-कदा अस्पतालों का निरीक्षण या शासन का ध्यान आकर्षित कराने तक ही सीमित हैं। उनकी इस बेरुखी से सरकारी अस्पतालों के मरीज ‘आह’ भर रहे हैं।
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यही वजह है कि मंडल मुख्यालय में राजकीय मेडिकल कालेज से लेकर दो जिला अस्पताल, ट्रामा सेंटर और आधा दर्जन सीएचसी और 48 पीएचसी मरीजों की उम्मीदों और शासन की मंशा पर खरे नहीं उतर रहे हैं।
जिले के सरकारी अस्पतालों में 167 डाक्टरों के पद स्वीकृत हैं। इनमें 62 पद रिक्त हैं। मानक के मुताबिक प्रत्येक सीएचसी और पीएचसी में छह स्पेशलिस्ट और दो मेडिकोलॉजिस्ट होने चाहिए। इनमें फिजीशियन, सर्जन, गॉयनोकोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, बाल रोग विशेषज्ञ और मेडिकल आफीसर के पद शामिल हैं, लेकिन स्पेशलिस्ट के ये सभी पद खाली हैं।
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कमोवेश यही स्थिति अन्य स्टाफ की है। डाक्टरों की कमी का यह रोना काफी पुराना है। इसके बाद भी जनप्रतिनिधि अपने रसूख का इस्तेमाल कर शासन से रिक्त पदों पर नियुक्ति कराने के प्रति गंभीर नहीं हैं। हरेक सीएचसी, पीएचसी में मात्र 2-2 एमबीबीएस डाक्टरों के सहारे अस्पताल चल रहा है।
बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय को पत्र भेजा है। बांदा मुख्यालय में नवनिर्मित 200 बेड के अस्पताल को शीघ्र चालू कराने और मेडिकल कालेज में आधुनिक मशीनें उपलब्ध कराने की मांग की है। आशा है कि जल्द ये सुविधाएं मिल जाएंगी। -आरके सिंह पटेल, सांसद (बांदा-चित्रकूट)।
बांदा जिला अस्पताल में सीटी स्कैन उपलब्ध कराया और एमआरआई की स्वीकृत कराया है। मेडिकल कालेज में भी आधुनिक मशीनों की स्थापना और विशेषज्ञों की नियुक्ति के लिए शासन को पत्र लिखा है। ग्राम पंचायत नाई और स्योढ़ा स्थित पीएचसी को उच्चीकृत करने के लिए भी मांग की है। -प्रकाश द्विवेदी, सदर विधायक
जसपुरा, तिंदवारी और मटौंध स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त डाक्टर और दवाओं के लिए लगातार प्रयास कर रहा हूं। सुविधाएं बढ़ाने और डाक्टरों के रिक्त पदों को भरने के लिए शासन से अनुरोध किया है। डॉक्टरों की कमी और दवाएं न मिलने की मरीजों की शिकायत पर समय-समय पर अस्पताल का निरीक्षण भी करता हूं। -बृजेश प्रजापति, विधायक तिंदवारी।
डाक्टरों की कमी के कारण मरीजों को बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर डाक्टरों के खाली पद भरने और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। अस्पतालों की बेहतरी के प्रयास किए जा रहे हैं। गांवों में स्वास्थ्य कैंप के लिए भी लिखा है। -राजकरन कबीर, विधायक नरैनी।
निर्वाचन क्षेत्र के गरीब मरीजों के गंभीर रोगों के इलाज के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से लगभग 70 लाख रुपये की मदद कराई है। सीएचसी बबेरू में महिला डाक्टर और अन्य विशेषज्ञों की नियुक्ति तथा न्यू पीएचसी में डाक्टर व स्टाफ तैनात करने के लिए स्वास्थ्य मंत्री व संबंधित विभागीय उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा है।-चंद्रपाल कुशवाहा, विधायक बबेरू।
सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में डाक्टरों की कमी पूरा करने के लिए प्रदेश में 2000 डाक्टरों की भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। इनकी नियुक्ति पर बांदा जिले को भी लगभग 50 डाक्टर मिलेंगे। डाक्टरों की कमी और स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने के लिए डीएम के माध्यम से शासन को कई बार पत्र भेजा गया है।-डॉ. संतोष कुमार, सीएमओ।
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