बांदा। पर्युषण पर्व के छठवें दिन मंगलवार को जैन समाज ने उत्तम तप धर्म की आराधना की।
छोटी बाजार स्थित जैन चैत्यालय में बाल ब्रह्मचारी पंडित श्री नन्हें भैया जी ने प्रवचन में कहा कि तप केवल शरीर को कष्ट देने का नाम नहीं है। यह आत्मशुद्धि और कर्मों की निर्जरा का माध्यम है।
उन्होंने कहा कि संयम और तप से क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे कषायों से दूर हुआ जा सकता है। बाहरी तप के साथ मन, वचन और कर्म की शुद्धता भी जरूरी है।
जैन अनुयायियों ने आचार्य तारण स्वामी द्वारा रचित ग्रंथों का पाठ किया। इसके बाद वेदी में विराजमान जिनवाणी की पूजा की गई। भजन-कीर्तन और आरती में श्रद्धालु भक्ति में लीन रहे। श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।