बांदा। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 265, 266 व 308 मेंं गवाहों के परीक्षण के लिए इलेक्ट्रानिक साक्ष्य पुलिस नियंत्रण वाले नामित पुलिस स्टेशन, कंट्रोल स्थल व पुलिस आफिस में नहीं होंगे। पहले नए कानूनों में इन धाराओं में इलेक्ट्रानिक साक्ष्य लेने की व्यवस्था पुलिस नियंत्रण वाले स्थानों पर की गई थी, जिसका वकील कड़ा विरोध कर रहे थे।
नए तीन कानूनों में खामियों को लेकर बांदा बार संघ ने प्रबल विरोध किया था। यहां से उपजी चिंगारी पूरे देश में फैली। बार कौंसिल ऑफ इंडिया ने इसे संज्ञान लिया और जिला बार संघ अध्यक्षों से सुझाव लिए। वकीलों की आपत्ति से सरकार को अवगत कराया। अंतत: सरकार ने दो पांव पीछे हटाते हुए वकीलों के दर्द को समझा और आदेश जारी किए कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 265, 266 व 308 मेंं गवाहों के परीक्षण के लिए इलेक्ट्रानिक साक्ष्य पुलिस नियंत्रण वाले नामित पुलिस स्टेशन, कंट्रोल स्थल व पुलिस आफिस में नहीं होंगे।
पहले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता को लेकर केंद्र सरकार द्वारा 13 जून 2024 को जारी नोटिफिकेशन में पुलिस नियंत्रण वाले नामित पुलिस स्टेशन, कंट्रोल स्थल, पुलिस आफिस में गवाहों के परीक्षण के लिए आडियो, वीडियो व इलेक्ट्रानिक साक्ष्य लेने की व्यवस्था की गई थी। केंद्र सरकार ने अब इस व्यवस्था को खत्म कर संशोधित आदेश जारी कर दिया है।
इस आशय का आदेश 15 जुलाई को केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला (आईएएस) ने प्रदेश के सभी प्रमुख सचिवों को भेजा है। जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष अशोक दीक्षित ने कहा कि यह बांदा बार संघ की बड़ी जीत है। अब नए आदेशों में उपरोक्त धाराओं के प्रयोजनों के लिए पुलिस स्टेशनों या पुलिस विभाग के नियंत्रण वाले स्थान को ऑडियो, वीडियो व इलेक्ट्रानिक साक्ष्य गवाही के लिए निहित नहीं किया जाएगा। वहीं स्थान इसके लिए निहित होगा जो पुलिस नियंत्रण से बाहर है। इससे पुलिस प्रभाव से मुक्त गवाहों के स्वतंत्र साक्ष्य लिए जा सकेंगे। लोगों को निष्पक्ष न्याय मिल सकेगा। अब साक्ष्यों में पुलिस की मनमानी नहीं चल सकेगी।
ये है इलेक्ट्रानिक साक्ष्य
इलेक्ट्रानिक साक्ष्य का मतलब है कि इलेक्ट्रानिक संयंत्रों के प्रयोग से सूचना को एकत्र करना। जो सुनाई दे और द्वष्टिवान भी हों। जैसे कि वीडियो कांफ्र्रेसिंग, आडियो और वीडियो के जरिए गवाही होना।