बांदा। पानी संरक्षण के लिए ‘जल ग्राम’ के रूप में दुनिया में शोहरत पा चुके महुआ ब्लाक के जखनी गांव के किसान अब बागवानी की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं। घरों से निकलने वाले गंदे पानी को नालियों के जरिये खेतों में पहुंचाकर धान की रिकार्ड पैदावार के बाद अबकी प्याज का रिकार्ड उत्पादन किया है। तमाम खेतों में लौकी तरोई, बैगन, भिंडी, करेला, परवल, टमाटर, मिर्च की भी खेती हो रही है।
जखनी गांव में छह से ज्यादा बड़े रकबे वाले तालाब हैं। इनकी विशेषता यह है कि इनमें पूरे साल पानी भरा रहता हैं। गांव का भूजल स्तर भी नहीं घट पाता। यहां के किसान बगैर सरकारी मदद के अपनी मेहनत और मशक्कत से खेती और बागवानी की यह चमकीली इबारत लिख रहे हैं। खास बात यह है कि गांव के युवाओं को भी खेती बारी में पूरी दिलचस्पी है।
उच्च शिक्षा के बाद भी इससे किनारा नहीं करते। गांव के बाशिंदे और सामाजिक कार्यकर्ता उमाशंकर पांडेय ने बताया कि इस वर्ष गांव के किसान रामविशाल कुशवाहा, गुलाब राजपूत, मेड़ेलाल राजपूत, राजा भइया वर्मा, निर्भय सिंह, बकरीद खां, रज्जू खां, शिवपूजन राजपूत, सुग्रीव राजपूत, बच्चा खां, इमाम अली, कल्लू राजपूत आदि ने अपने खेतों में सिर्फ एक-एक बीघा क्षेत्रफल में 40-40 क्विंटल प्याज की पैदावार की है। यह प्याज किसी मायने में कमजोर नहीं है। लगभग 1000 क्विंटल प्याज का भंडार है।
जखनी के किसानों ने लगन और मेहनत से प्याज तो पैदा कर ली पर लॉकडाउन से बाजार में आई जबरदस्त गिरावट से प्याज बेचने का संकट है। बाजार में न भाव मिल रहा है और न पर्याप्त बिक्री। किसानों का कहना है कि प्याज को बहुत ज्यादा दिन तक रोका नहीं जा सकता। ऐसे में औने-पौने दामों में बेचना जरूरी है।
उधर, जिला उद्यान अधिकारी परवेज खां का कहना है कि जखनी के किसान हमेशा जिले के अन्य किसानों को प्रेरणा देते रहे हैं। बगैर सरकारी अनुदान और सुविधाओं के अपने परंपरागत तौर तरीकों से बासमती सहित अन्य किस्म के चावल का रिकार्ड उत्पादन करते हैं। अब बागवानी में भी यहां के किसान अपना नाम रोशन कर रहे हैं।
लौकी की पैदावार दिखाते जखनी के किसान।- फोटो : BANDA