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अब घरों में कराएंगे शिशुओं को अन्न प्राशन

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अन्न प्राशन के तहत बच्चे को पोषाहार खिलातीं आंगनबाड़ी। - फोटो : BANDA
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बांदा। कोरोना वायरस के खतरे से शिशुओं को बचाने के लिए अब आंगनबाड़ी केंद्रों में अन्न प्राशन की रस्म पर रोक लगा दी गई है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अब घरों में जाकर शिशुओं को अन्न प्राशन कराएंगी। जिले में 1705 आंगनबाड़ी केंद्रों पर कार्यरत कार्यकर्ता ऐसे बच्चों को चिह्नित कर रही हैं। 20 जून को पूरे जनपद में अन्न प्राशन कराया जाएगा।
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6 माह की उम्र पूरी होते ही बच्चे को अन्न प्राशन कराया जाता है, लेकिन लॉकडाउन और कोरोना वायरस के चलते आंगनबाड़ी केंद्रों की यह गतिविधियां बंद पड़ी हैं। ऐसे में शासन ने अब अन्न प्राशन की रस्म घरों में ही कराने के निर्देश दिए हैं।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर इसकी तैयारियां करा रही हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी इशरतजहां ने बताया कि जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में हर महीने की 20 तारीख को अन्न प्राशन्न कार्यक्रम होता है। लेकिन कोरोना के दौर में यह बंद कर दिया गया है।
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आंगनबाड़ी घरों पर जाकर सोशल डिस्टेंस का मानक अपनाते हुए माताओं को यह रस्म कराएंगी। टीकाकरण और धात्री माताओं को भोजन के बारे में बताएंगी। स्तनपान के लिए भी प्रोत्साहित करेंगी। 6 वर्ष तक के बच्चों, धात्री और गर्भवती महिलाओं को पुष्टाहार भी बांटा जा रहा है।
छह माह के बाद दूध के साथ ऊपरी आहार भी जरूरी
बांदा। सुपोषण कार्यक्रम की सहभागी संस्था यूनिसेफ के मंडलीय समन्वयक पवन मिश्रा ने बताया कि 6 माह के बाद बच्चे को मां के दूध के साथ ऊपरी आहार की भी जरूरत होती है। सही समय पर और सही मात्रा में खाना देकर बच्चों को कुपोषण से बचाया जा सकता है।
बताया कि 6 से 8 माह तक के बच्चों को एक से दो चम्मच मसला हुआ अर्ध ठोस आहार देना चाहिए। 8 माह से एक साल तक के बच्चे को आधी कटोरी आहार दिन में दो बार और एक से दो वर्ष तक के बच्चे को एक कटोरी आहार दिन में 2 से 3 बार देना चाहिए।
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