सरकार के ‘बेटी बचाओ’ अभियान का नतीजा कहा जाए या समाज की सोंच में परिवर्तन। बेटियां बढ़ रही हैं। लंबे अरसे के बाद लिंगानुपात के आंकड़ें चौंकाने वाले आए हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों ही बाशिंदों में बेटियों के प्रति रुझान बढ़ा है। इसकी ताजी बानगी लिंगानुपात के ताजे आंकड़े हैं। ग्रामीण इलाकों में कन्या लिंगानुपात में 38 का इजाफा हुआ है। शहर में भी प्रति हजार बेटों पर 20 बेटियां बढ़ी हैं।
कन्याओं की जन्मदर शुरू से ही कमजोर रही है। जनसंख्या या स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में पिछले कई दशकों में लिंगानुपात यहां 900 का आंकड़ा नहीं पार कर पाया। यानी प्रति 900 बेटियां और 1000 बेटे पैदा होते रहे हैं। कन्याओं की जन्म दर बढ़ाने के लिए कई दशकों से सरकारी और गैर सरकारी संगठनों की कवायदें होती रही हैं। लेकिन नतीजे कुछ खास नहीं निकले।
अब इधर कुछ वर्षों से केंद्र और राज्य की मौजूदा सरकारों ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसे लुभावने नारों के साथ योजनाएं लागू की हैं। शायद इसी का नतीजा है कि चित्रकूटधाम मंडल मुख्यालय बांदा जनपद में पिछले तीन वर्षों में बेटियों की जन्म दर में काफी संतोषजनक सुधार आया है।
जिले के गांवों में वर्ष 2015 में लिंगानुपात 904 था। यानी प्रति हजार बेटों पर मात्र 904 बेटियां पैदा हो रही थीं। अगले वर्ष 2016 में यह दर बढ़कर 919 हो गई। हाल ही में खत्म हुए पिछले वित्तीय वर्ष में लिंगानुपात का आंकड़ा 942 पहुंच गया। इसी तरह बांदा शहर में भी बेटियां बढ़ी हैं। दो वर्ष पूर्व शहर में लिंगानुपात का आंकड़ा 808 था। यानी हजार बेटों पर 808 बेटियां जन्म ले रही थीं। चालू वर्ष 2018 में मात्र मई माह तक लिंगानुपात 928 पहुंच गया है। जबकि आधे से ज्यादा वर्ष बाकी है।
वर्ष बालक बालिका कुल जन्म लिंगानुपात
2015 19,207 17,355 36,562 904
2016 18,661 17,153 35,814 919
2017 19,607 18,468 38,075 942
शहर में बढ़ी बेटियों का अनुपात
वर्ष बालक बालिका कुल जन्म लिंगानुपात
2016 1438 1162 2600 808
2017 1240 1163 2403 938
2018 640 594 1234 928
(मई तक)
2011 की जनगणना में 863 था लिंगानुपात
बांदा। वर्ष 2011 की जनगणना में बांदा जनपद में लिंगानुपात 863 था। यानी प्रति हजार बेटों पर मात्र 863 बेटियां पैदा हो रही थीं। जनगणना के समय जनपद की कुल जनसंख्या 17,99,541 थी। इसमें 9,66,123 पुरुष और 8,33,418 महिलाएं थी। इसके पूर्व 2001 की जनगणना में बांदा जनपद में लिंगानुपात 860 था। ब्यूरो
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भ्रूण हत्या और लिंग चयन अधिनियम का भी असर
बांदा। बेटियों के बढ़ते अनुपात पर स्त्री रोग विशेषज्ञ और महिला संगठनों से जुड़ीं डा.शबाना रफीक (एमडी) का कहना है कि सरकार द्वारा कन्या जन्म के प्रति चलाई जा रही योजनाओं और भ्रूण हत्या को लेकर कड़े नियमों से भी लिंगानुपात बढ़ा है। लिंग चयन प्रतिषेध अधिनियम भी कारगर साबित हो रहा है। डा.शबाना कहती हैं कि इसके अलावा समाज में कन्याओं के प्रति जागरुकता भी आई है। यह अच्छी शुरूआत और अच्छा संदेश है। ब्यूरो
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32 दिन बीते, लिपिक को नहीं किया गया रिलीव
बांदा। युवा कल्याण विभाग में तैनात लिपिक का चित्रकूट जनपद तबादला हो जाने के बाद भी उन्हें यहां से कार्यमुक्त नहीं किया जा रहा है। पीआरडी जवानों ने जिलाधिकारी से उन्हें तत्काल रिलीव किए जाने की मांग की है। सपहाई गुरौली निवासी लवेश कुमार और पथरहा पुरवा (बिसंडा) के राममनोहर ने अर्जी में कहा है कि लिपिक जनपद में 25 सालों से तैनात हैं। कई बार तबादला किया गया, लेकिन स्थानांतरण रूक गया। युवा कल्याण महानिदेशक शरद कुमार सिंह ने उक्त लिपिक का तबादला 31 मई को चित्रकूट जनपद कर दिया है। साथ ही निर्देश दिए थे कि कार्यमुक्त न किए जाने पर अनुशासनहीनता मानी जाएगी। लेकिन आदेश को दरकिनारकर दिया। युवा कल्याण विभाग में यहां लिपिक का एक पद है। तारकेश्वरी यहां अतिरिक्त में तैनात हैं। पीआरडी जवानों ने शोषण का भी आरोप लगाया।