बांदा। चित्रकूटधाम मंडल में ठंड का कहर थम नहीं रहा। लगातार तीसरे दिन न्यूनतम पारा 3 और 4 डिग्री के आसपास टिका रहा। गलन में आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर रखा है। बांदा में तीन और मौतें हो गईं। इन्हें मिलाकर अब तक ठंड से 25 जानें जा चुकी हैं।
सोमवार को भी ठंड का शिकंजा कसा रहा। उत्तर-पश्चिम से आ रही बर्फीली हवाओं से ठंड से बचाव के तमाम उपाय नाकाफी साबित हो रहे हैं। दिन में दोपहर के आसपास निकले सूरज की धूप तापमान बढ़ाने में नाकाम साबित हो रही है। अधिकतम पारा 15 डिग्री सेल्सियस से आगे नहीं बढ़ा। 3 से 4 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल रही हवाएं गर्म कपड़ों के बाद जिस्म ठिठुराती रहीं। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक अभी कई दिन तक राहत मिलने के आसार नहीं हैं।
उधर, अलग-अलग स्थानों में ठंड से तीन वृद्धों की मौत हो गई। बबेरू तहसील क्षेत्र के पारा बिहारी (बिसंडा) गांव निवासी अलाउद्दीन (65) पुत्र शमशुद्दीन की दो दिन पूर्व घर में हालत बिगड़ गई। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। सोमवार को सुबह उसकी मौत हो गई। मृतक पेशे से किसान था।
एक अन्य घटना में बदौसा रोड (अतर्रा) निवासी पेशे से किसान श्याम सुंदर सोनी (70) को रविवार को शाम गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाकर भर्ती कराया गया। सोमवार को सुबह उसकी मौत हो गई। तीसरी घटना में पपरेंदा गांव निवासी वीरेंद्र सिंह (70) की सोमवार को सुबह घर में मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि रविवार की रात खेत में पानी लगाते समय ठंड लग गई।
सभी स्कूल-कालेज पहली तक बंद
बांदा। शीतलहर में कोई सुधार न होने से डीएम हीरा लाल ने शासन के निर्देशों का हवाला देकर जनपद के सभी स्कूल-कालेजों में छुट्टी की अवधि बढ़ाकर पहली जनवरी तक कर दी है। सभी प्रधानाचार्यों और प्राचार्यों को जारी आदेश में डीएम ने कहा है कि शासन के निर्देश के अनुसार सभी महाविद्यालय, तकनीकी एवं व्यवसायिक शिक्षण संस्थान, प्राथमिक व उच्च प्राथमिक, उच्चतर माध्यमिक और इंटर कालेज (सभी बोर्ड) में 31 दिसंबर और पहली जनवरी को भी अवकाश रहेगा। शासन द्वारा पूर्व से निर्धारित विभागीय/प्रतियोगी परीक्षाएं यथावत होंगी।
कोहरा से फसलों में पाला का खतरा
बांदा। शीतलहर और कोहरा से फसलों में पाला पडने का खतरा जताया गया है। जिला कृषि अधिकारी डा. प्रमोद कुमार ने कहा कि पाले के आसार हों तो फसल में हल्की सिंचाई देने से तापमान 0 डिग्री से नीचे नहीं गिरेगा। सिंचाई से 0.5 से 2 डिग्री सेल्सियस तक तापमान बढ़ जाता है। यह भी कहा कि नर्सरी को पाला ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। ऐसे में नर्सरी को रात में प्लास्टिक की चादर से ढक दें। इससे तापमान 2 से 3 डिग्री बढ़ जाएगा। पौधे बच जाएंगे।
पॉलिथीन न हो तो पुआल से भी पौधे ढके जा सकते हैं। अलबत्ता पौधों का दक्षिण-पूर्व हिस्सा खुला रहे। ताकि उन्हें सुबह और दोपहर को धूप मिल सके। जिस दिन पाले के आसार हों उन दिनों सल्फर के 80 डब्ल्यूडीजी पाउडर को तीन किलो एक एकड़ में छिड़काव करके सिंचाई करें। खेत की उत्तरी और पश्चिमी मेड़ों और बीच-बीच में वायु अवरोधक पेड़ शहतूत, शीशम, बबूल, जामुन आदि लगाने से भी पाले और ठंडी हवा के झोंकों से फसल बचती है।