बांदा। बुंदेलखंड में सूखे और अन्य दैवी आपदाओं के प्रति केंद्र या राज्य सरकारें कितनी संवेदनशील हैं, इसकी बानगी पांच साल पूर्व केंद्र सरकार द्वारा बुंदेलखंड में सर्वे के लिए भेजी गई उच्चस्तरीय टीम की सरकारों से की गई सिफारिश और सुझाव पर अमल से लगाया जा सकता हैं।
तत्कालीन केंद्र सरकार द्वारा बुंदेलखंड को दिए गए विशेष पैकेज के बाद केंद्र ने राष्ट्रीय वर्षा सिंचित क्षेत्र प्राधिकरण के मुख्य अधिशासी अधिकारी डॉ. जेएस सामरा के नेतृत्व मेें यहां एक टीम भेजी थी। टीम ने पूरे बुंदेलखंड का भ्रमण कर केंद्र और राज्य सरकारों को रिपोर्ट दी थी। कुछ सिफारिशें और सुझाव दिए थे, जो ठंडे बस्ते में चले गए।
डॉ. सामरा की टीम पहली बार जुलाई 2011 में बुंदेलखंड आई थी। चारोें जनपदों में भ्रमण कर बुंदेलखंड से हुए कामों और खर्च का निरीक्षण किया था। बाद में यह टीम दोबारा नवंबर 2013 में आई। सामरा की टीम ने केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट भेजी थी।
प्रदेश सरकार से संबंधित योजनाओं की रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी थी। अपनी सिफारिशों ने डॉ. सामरा ने तेजी से गिरते जलस्तर को रोकने और पशुओं का चारागाह का दायरा बढ़ाने और केन-बेतवा गठजोड़ से सूखा रोकने को कहा था।
जल संरक्षण, चारा उत्पादन, बीज/खाद भंडार बैंक की स्थापना, पशु नस्ल सुधार, बेकार या खाली पड़ी जमीनों पर फलदार वृक्ष या चारागाह और पशुपालन बढ़ाने, किसानों को उनकी क्रेडिट क्षमता के अनुसार कर्ज देने, बरियारपुर बैराज और राजघाट नहर प्रोजेक्ट तत्काल पूरा करने, वर्षा जल के लिए दीर्घकालिक योजनाएं बनाने, खरपतवार पर नियंत्रण कर खरीफ का बोया गया क्षेत्रफल बढ़ाने की सिफारिशें की थीं।
इसके अलावा डॉ. सामरा ने उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड को 3866 करोड़ और मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड को 4310 करोड़ की राशि पैकेज के रूप में देने की भी सिफारिश की थी, पर इनमें से किसी भी सिफारिश पर भी ठोस अमल नहीं हुआ। सब ठंडे बस्ते में चली गईं।