बांदा। सूखे से प्रभावित बांदा जनपद में हर तरफ पेयजल को लेकर हाहाकार है। भीषण गर्मी में लोगों को बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। दूसरी तरफ पंचायती राज विभाग हैंडपंप मरम्मत, चरही निर्माण और टैंकरों से पेयजल आपूर्ति के आंकड़े परोस कर अधिकारियों को गुमराह कर रहा है। चरही निर्माण में नियम-निर्देशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
शासन ने 14वें वित्त आयोग की धनराशि से सभी गांवों में चरही निर्माण के निर्देश दिए हैं। डीएम योगेश कुमार भी इस मामले में खुद काफी गंभीर हैं और लगातार नजर रख रहे हैं। डीपीआरओ से हर रोज हैंडपंपों की मरम्मत, टैंकरों से पेयजल आपूर्ति और चरही निर्माण की रिपोर्ट देने को कहा है।
पंचायतीराज विभाग ने डीएम को भेजी रिपोर्ट में 863 चरही निर्माण हो जाने का दावा किया है। साथ ही 438 ग्राम पंचायतों में निर्माण चल रहे होने की सूचना दी है, लेकिन चरही निर्माण में मानक का कोई ध्यान नहीं रखा जा रहा। घटिया ईंटें और मसाला का इस्तेमाल हो रहा है। ऊपर कुछ ज्यादा सीमेंट का प्लास्टर कर दिया जा रहा है। नीचे नींव की कोई गहराई नहीं है। ऐसे में यह चरही चंद दिनों में ही ध्वस्त हो जाएगी।
चहरी निर्माण में डीएम ने चार फिट चौड़ी, छह फिट लंबी और एक फिट गहरी का निर्देश दिया है, लेकिन किसी ग्राम पंचायत में आठ फीट लंबी चरही बनाई जा रही तो कहीं छह फीट चौड़ी। यह भी निर्देश है कि चरही छायादार स्थान पर और हैंडपंप के नजदीक बनाई जाए। हैंडपंप में पानी भरने वालों को कोई दिक्कत न हो। किसी गांव में इसकी लागत छह हजार आ रही है तो किसी में आठ हजार दिखाया जा रहा है। मजे की बात तो यह है कि विभाग के पास चरही निर्माण का आंकड़ा सिर्फ ब्लाक वार है। ग्राम पंचायतों का ब्योरा है ही नहीं।
टैंकर खरीद में भी गोलमाल
बांदा। जिले की सभी आठ ब्लाकों की 471 ग्राम पंचायतों में से 333 में टैंकरों के जरिये पेयजल आपूर्ति के आदेश हैं। डीपीआरओ द्वारा डीएम को भेजी गई ताजी रिपोर्ट में 185 टैंकर खरीदे गए हैं। 158 टैंकर खरीदने की प्रक्रिया चल रही है। 116 टैंकरों से पेयजल आपूर्ति हो रही है।
13 टैंकर 200 रुपये प्रति टैंकर प्रतिदिन की दर से किराए पर लिए गए हैं। कुछ गांवों के लोग बताते हैं कि पुराने टैंकरों को ही रंग-रोगन करके नई खरीद बताई जा रही है। खरीदे गए टैंकर की वास्तविक कीमत 65 हजार रुपये है। जबकि पंचायतें इस पर 98 हजार रुपये रुपये खर्च दिखा रही हैं।
चरही बनाने का जिम्मा ग्राम पंचायतों को सौंपा गया है। प्रति चरही करीब 6 से 8 हजार रुपये लागत आ रही है। निर्माण के बाद इनकी जांच कराई जाएगी। इसी तरह ज्यादातर टैंकरों की खरीद पुखरायां (कानपुर) से की गई है। एक टैंकर की कीमत 98 हजार रुपये है। पुराने टैंकरों को रंगने की उन्हें जानकारी नहीं है।
-दयाराम कुशवाहा, डीपीआरओ, बांदा।