बांदा। कृषक समृद्धि योजना के तहत चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले को एक भी नंदिनी दुग्ध डेयरी नहीं मिली। हालांकि जिले को आठ मिनी नंदिनी दुग्ध डेयरी मिली है। पशुपालकों को इकाई लागत पर 50 फीसदी अनुदान मिलेगा। इसके लिए जनपद में 84 आवेदन आए हैं। लाटरी के जरिए डेरी का आवंटन होगा।
जिला मुख्य पशु चिकित्साधिकारी एसके बैस ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में जिले को सात नंदिनी व तीन मिनी नंदिनी दुग्ध डेयरी का लक्ष्य मिला था। लेकिन चालू वर्ष में जिले को एक भी नंदिनी दुग्ध डेयरी नहीं मिली हैं। हालांकि जिले को आठ मिनी नंदिनी दुग्ध डेयरी का लक्ष्य मिला है। बताया कि इन दुग्ध डेयरी इकाई की लागत 65 लाख है।
इसमें पशुपालक को 50 से अधिक देसी नस्ल की गाय रखनी होती है। मिनी नंदिनी दुग्ध डेयरी इकाई की लागत 32 लाख है। इसमें पशुपालक को स्थायी शेड के साथ ही 10 देसी नस्ल की गाय रखनी होती है। बताया कि इन डेयरी के लिए आवेदन मांगे गए हैं। अब तक जिले को 84 आवेदन प्राप्त हो गए हैं। बताया कि जल्द डेयरियों का आवंटन लाटरी पद्धति से किया जाएगा। बताया कि डेयरी के खुलने के बाद जनपद में दूध की काफी हद तक कमी कम होगी। पिछले वर्ष की सात नंदिनी व तीन मिनी नंदिनी डेयरी पर भी काम हो रहा है।