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Banda News: 741 बंदी-कैदियों के लिए एक भी एंबुलेंस नहीं, आपात स्थिति में हर मिनट भारी

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मंडल कारागार। संवाद
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बांदा। मंडल कारागार बांदा में बंदियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाएं उसी अनुपात में नहीं बढ़ पाई हैं। 567 बंदी-कैदियों की क्षमता वाली जेल में वर्तमान में 741 बंदी और कैदी निरुद्ध हैं। यानी क्षमता से 174 अधिक बंदी जेल में रह रहे हैं। इसके बावजूद जेल के पास अपनी एक भी एंबुलेंस नहीं है। ऐसे में किसी बंदी की तबीयत अचानक बिगड़ने या गंभीर हादसा होने पर समय पर उपचार उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती बन जाता है।
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हाल ही में जेल में बंद कैदी अभिषेक सिंह की आत्महत्या और बंदी नितीश की मौत के बाद जेल की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार कई बार जेल प्रशासन की ओर से एंबुलेंस उपलब्ध कराने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजे गए, लेकिन अब तक व्यवस्था नहीं हो सकी है। जेल में किसी बंदी की हालत गंभीर होने पर उसे मेडिकल कॉलेज या जिला अस्पताल भेजने के लिए बाहरी संसाधनों पर निर्भर रहना पड़ता है। कई बार वाहन की उपलब्धता और सुरक्षा बल की व्यवस्था में भी समय लग जाता है। ऐसे में आपातकालीन चिकित्सा की गोल्डन आवर अवधारणा प्रभावित होने का खतरा बना रहता है।
कारागार विशेषज्ञों का मानना है कि क्षमता से अधिक बंदियों वाली जेल में एक समर्पित एंबुलेंस बुनियादी आवश्यकता है। इससे अचानक बीमारी, आत्महत्या के प्रयास, झगड़े में घायल बंदियों अथवा हृदयाघात जैसे मामलों में तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है। जेल में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नए नियम लागू किए जा रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं को भी समान प्राथमिकता देने की जरूरत महसूस की जा रही है। बंदियों की बढ़ती संख्या के बीच एक एंबुलेंस की मांग अब केवल सुविधा नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुकी है। जेल अधीक्षक शशिकांत सिंह बताते हैं कि एंबुलेंस की मांग के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र फिर से लिखा गया है।
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आंकड़े एक नजर में :
क्षमता : 567 बंदी-कैदी
वर्तमान संख्या : 741
क्षमता से अधिक : 174 बंदी
जेल की अपनी एंबुलेंस : एक भी नहीं
गंभीर मरीजों को भेजने के लिए : बाहरी संसाधनों पर निर्भरता
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