सौर ऊर्जा से निर्धन मजदूरों के घरों को रोशन करने की सरकारी मंशा पूरी
नहीं हुई। दो विभागों का नाकारापन आड़े आ गया। हालांकि ये दोनों ही विभाग
एक-दूसरे के सिर ठीकरा फोड़ रहे हैं। नेडा अधिकारी ने तो मजदूरों को ही सौर
ऊर्जा का तमीज न होने की बात कह डाली।
चित्रकूटधाम मंडल के मजदूरों को
प्रदेश सरकार ने सौर ऊर्जा प्लांट देने की योजना लागू की है। चारों जनपदों
में चालू वित्तीय वर्ष में 610 मजदूरों को यह प्लांट दिया जाना है। एक
सोलर सेट की कीमत 9350 रुपये है यानी कुल 57,03,500 रुपये के सोलर प्लांट
दिए जाना है।
अब तक सिर्फ 86 मजदूरों को सौर प्लांट सेट सौंपे गए हैं। वह
भी उनके घरों में धूल खा रहे हैं। इनका इंस्टालेशन करके चालू नहीं किया
गया। कई महीनों से रखीं बैट्रियां खराब होने की कगार पर हैं। बांदा में 300
मजदूरों को सौर ऊर्जा प्लांट सेट देने का लक्ष्य है लेकिन अब तक सिर्फ 34
को ही दिए गए हैं।
चित्रकूट में 120 में 52 मजदूरों को सेट मिले हैं।
हमीरपुर और महोबा में क्रमश: 70 और 120 सोलर सिस्टम दिए जाना हैं, लेकिन अब
तक एक को भी नहीं दिया गया। अगले महीने यह वित्तीय वर्ष खत्म हो जाएगा।
ऐसे में मजदूरों को सरकार की इस योजना से वंचित होना तय माना जा रहा है।
86
मजदूरों को दिसंबर माह में सौर ऊर्जा सेट दिए गए थे। नेडा ने इन्हें आज तक
चालू नहीं किया। बैट्रियां डिस्चार्ज होकर खात्मे की कगार पर हैं। क्योटरा
निवासी मजदूर राजाराम पुत्र बाबादीन ने बताया कि दो माह तक इंतजार करने के
बाद उसने अपने सेट को प्राइवेट मिस्त्री से चालू करा लिया है। नेडा से कोई
नहीं आया।
जिन
मजदूरों को सौर ऊर्जा सेट दे दिए गए हैं और चालू नहीं किए गए उनके बारे में
नेडा परियोजना अधिकारी सुरेंद्र कुमार ने फूहड़ टिप्पणी दी। वे बोले-
मजदूरों को इन्हें लगाने की तमीज ही नहीं है। उन्हें अभी तक कोई शिकायत
नहीं मिली है। सोलर सेट खराब हैं तो रिपेयर कराया जाएगा।
उप श्रमायुक्त आरबी लाल का कहना है कि सोलर सिस्टम को लगाकर चालू करने का
जिम्मा नेडा का है। मजदूरों से उन्हें शिकायतें मिली हैं। उन्हें कई बार
नेडा को पत्र लिखकर सौर ऊर्जा सिस्टम चालू करने को कहा है। लेकिन नेडा वाले
स्टाफ की बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं।