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बुंदेलखंड में नहीं पानी की कमी

Thu, 28 Jul 2016 11:22 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला, बांदा
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भूजल संबंधी पुस्तिका का विमोचन करते कृषि एवं प्रौद्योगिक कुलपति प्रो. एसएल गोस्वामी व अन्य अधिकारी। - फोटो : अमर उजाला
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बांदा। केंद्रीय भूमि जल बोर्ड का दो दिवसीय भूजल प्रबंधन प्रशिक्षण बृहस्पतिवार को शुरू हो गया। विशेषज्ञों ने कहा कि बुंदेलखंड में पानी प्रचुर मात्रा में है। बस कमी है तो कुशल प्रबंधन की। इसी वजह से सूखे का सामना करना पड़ता है।
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कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन कुलपति डॉ. एसएल गोस्वामी ने दीप जलाकर किया। इसमें कृषि विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं, स्वयंसेवी संगठन और ग्रामीण भाग ले रहे हैं। इनकी संख्या लगभग 160 है। कुलपति ने कहा कि अंधाधुंध दोहन से भूजल स्तर में निरंतर गिरावट आई है।

साथ ही भूजल की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है। कहा कि बुंदेलखंड में पानी काफी मात्रा में उपलब्ध है। कुशल जल प्रबंधन न होने से सूखे की स्थिति का सामना करना पड़ता है। सबसे ज्यादा किसान प्रभावित होता है।
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चित्रकूटधाम मंडल अपर आयुक्त उमाकांत त्रिपाठी और संयुक्त विकास आयुक्त शिव कुमार मिश्र ने कहा कि भूजल प्रबंधन का समुचित उपयोग कर जल संरक्षित किया जा सकता है। तालाबों का संवर्धन और पौधरोपण मुख्य रूप से होना चाहिए।

विश्वविद्यालय कुल सचिव देवीदास और निदेशक प्रसार डॉ. एनके वाजपेई ने खेत-तालाब योजना और प्राकृतिक रिचार्ज के बारे में जानकारियां दीं। प्रशिक्षण दे रहे छात्रों और किसानों से जल उपयोग कुशलता बढ़ाने को कहा।

मेजबान केंद्रीय भूमि जल बोर्ड के क्षेत्रीय निदेशक (उत्तरी क्षेत्र, लखनऊ), वाईबी कौशिक ने बुंदेलखंड में विभाग के क्रियाकलापों की जानकारी दी। तकनीकी सत्र में केंद्रीय भूूमि जल के वैज्ञानिक टीके पंत, जगदंबा प्रसाद, सैदुल हक, अनिरुद्ध सिंह और एसपी दुबे नेव्याख्यान दिए।

जादूगर अरुण प्रताप सिंह ने जादू के जरिये जल संरक्षण के तरीके बताए। धन्यवाद प्रस्ताव वैज्ञानिक सैदुल हक ने पेश किया। संचालन वैज्ञानिक पीके त्रिपाठी ने किया। समापन शुक्रवार (29 जुलाई) को होगा। प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाणपत्र दिए जाएंगे।
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