बांदा। जिले के सबसे बड़े जिला अस्पताल में गंभीर बाल मरीजों के लिए वेंटिलेटर की सुविधा नहीं है। बाल रोग वार्ड में एक भी वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं है।
गंभीर हालत में पहुंचने वाले बच्चों को सिलिंडर के जरिये ऑक्सीजन दी जाती है। अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में चार वेंटिलेटर जरूर क्रियाशील हैं लेकिन इनमें गंभीर मरीजों को भर्ती किया जाता है। ऐसे में बाल मरीजों के लिए अलग वेंटिलेटर की व्यवस्था न होना व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़ा करता है।
इन दिनों वायरल बुखार और डायरिया के चलते अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ी हुई है। जिला अस्पताल में रोज करीब 1500 से 1800 मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में बच्चे भी शामिल हैं। कई बच्चे तेज बुखार, डायरिया और गंभीर संक्रमण की हालत में पहुंच रहे हैं। ऐसे में किसी बच्चे की हालत बिगड़ने पर वेंटिलेटर की जरूरत पड़ने पर जिला अस्पताल में बाल रोग वार्ड के लिए कोई अलग व्यवस्था नहीं है।
रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में बाल मरीजों के लिए अलग व्यवस्थाएं हैं। यहां कुल 151 वेंटिलेटर उपलब्ध हैं, जिनमें 100 पीएम केयर के तहत कोविड काल से रिजर्व में हैं। 51 वेंटिलेटर क्रियाशील हैं। इनमें पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) में 19, सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में तीन, इमरजेंसी में 14 और इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में 15 वेंटिलेटर संचालित हैं। बाल रोग विभाग की अलग इमरजेंसी भी चल रही है।
वर्जन
- जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में चार वेंटीलेटर क्रियाशील हैं। उन्हीं के जरिए गंभीर मरीजों को भर्ती किया जाता है। बाल रोग विभाग के लिए अलग से वेंटीलेटर की कोई व्यवस्था नहीं है।-डॉ. किशुन कुमार, सीएमएस, जिला अस्पताल, पुरुष, बांदा।
- रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में 51 वेंटीलेटर क्रियाशील हैं। नवजात शिशुओं के लिए एसएनसीयू में वेंटीलेटर की सुविधा है। बाल रोग विभाग की अलग इमरजेंसी भी संचालित हैं। उनके यहां बच्चों के इलाज की कोई समस्या नहीं है।-डाॅ. सुनील कौशल, प्राचार्य, रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज, बांदा।
बाल रोग विभाग में जरूरी उपकरण
- पीडियाट्रिक वेंटिलेटर: सांस न ले पाने वाले गंभीर बच्चों को कृत्रिम सांस देने के लिए।
- रेडिएंट वार्मर: नवजात शिशुओं के शरीर का तापमान स्थिर रखने के लिए।
- इंक्यूबेटर: समय से पहले जन्मे बच्चों को संक्रमण से बचाने और नियंत्रित वातावरण देने के लिए।
- फोटोथेरेपी मशीन: नवजात शिशुओं में पीलिया के इलाज के लिए।
- पीडियाट्रिक पल्स ऑक्सीमीटर: बच्चों के खून में ऑक्सीजन का स्तर और हृदय गति मापने के लिए।
- ब्लड प्रेशर कफ: बच्चों की बांहों के आकार के अनुसार छोटे ब्लड प्रेशर कफ।
- सीपीएपी मशीन: फेफड़ों को खुला रखने और सांस लेने में मदद करने के लिए।
- ऑक्सीजन हुड या कैनुला: बच्चों को सुरक्षित तरीके से ऑक्सीजन देने के लिए।