बुंदेलखंड में पर्यावरण को बचाने के लिए हरित क्रांति की योजना महज कागजी साबित हुई। पिछले 9 वर्ष में बुंदेलखंड को हरा-भरा बनाने के लिए 253 करोड़ रुपये से ज्यादा पौधरोपण में खर्च कर दिए गए। करीब 16 करोड़ पौधे रोपने का दावा जमीन पर कहीं नहीं दिखाई देता।
राष्ट्रीय वन नीति के तहत 33 फीसदी वन क्षेत्र अनिवार्य है, लेकिन वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक चित्रकूट को छोड़कर किसी भी जनपद में 5 या 6 फीसदी से ज्यादा वन भूमि नहीं है।
पूरे बुंदेलखंड में सिर्फ 10 फीसदी ही वन भूमि है। जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत स्वयंसेवी आशीष सागर ने वन विभाग से जो आंकड़े और सूचनाएं इकट्ठा की हैं, उनके मुताबिक वर्ष 2005 से वर्ष 2014 तक विभाग बुंदेलखंड के बांदा, चित्रकूट, महोबा, हमीरपुर, जालौन और झांसी जनपदों में लगभग 253 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च कर चुका है। इस भारी भरकम बजट से साढे़ 16 करोड़ से ज्यादा पौधे रोपने का दावा किया गया है।
बसपा सरकार में मुख्यमंत्री मायावती ने बुंदेलखंड में एक करोड़ पौधे अलग से रोपने की योजना लागू की थी। इसमें कई करोड़ रुपये खर्च हुए। मौजूदा सरकार भी हर साल बुंदेलखंड को हरा-भरा बनाने और पर्यावरण सुधारने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है।
वन नीति 33 की, है सिर्फ 10 फीसदी वन क्षेत्र
राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार किसी भी जनपद के भौगोलिक परिक्षेत्र में 33 फीसदी वन क्षेत्र अनिवार्य है, लेकिन बुंदेलखंड में यह 10 फीसदी है। सबसे कम वन क्षेत्र 1.21 प्रतिशत (5439 हेक्टेयर) बांदा जनपद में है। वन क्षेत्र में सबसे अव्वल चित्रकूट जनपद है। यहां 21.8 फीसदी (48,171 हेक्टेयर) वन भूमि है। महोबा में 5.45 प्रतिशत (15,880 हेक्टेयर), हमीरपुर में 3.6 फीसदी (24,014 हेक्टेयर), झांसी में 6.66, जालौन में 5.6 और ललितपुर में 6.5 प्रतिशत वन क्षेत्र है।
वन नियम : एक पेड़ काटो तो दो पौधे लगाओ
उत्तर प्रदेश वन संरक्षण अधिनियम 1976 के अंतर्गत पेड़ काटने की अनुमति वन विभाग से लेनी होती है। अनुमति इस शर्त पर दी जाती है कि एक वृक्ष को काटने पर दो पौधे लगाने होंगे और इसका घोषणा पत्र वन विभाग को देना होगा। ऐसा न करने पर अनुमति के समय जमा कराई गई जमानत राशि जब्त कर ली जाती है। बुंदेलखंड में पेड़ तो खूब कटे लेकिन काटने वालों ने उसके बदले पेड़ लगाकर घोषणा पत्र नहीं दिया।
पहाड़ों के खनन से 1441 वर्ग किमी जमीन बंजर
बांदा। समाजसेवी व आरटीआई एक्टिविस्ट आशीष सागर ने बताया कि बुंदेलखंड का पर्यावरण बिगाड़ने में रात-दिन और अंधाधुंध हो रहा वैध और अवैध खनन भी जिम्मेदार है। पहाड़ों के खनन से 1441 वर्ग किलोमीटर जमीन बंजर पड़ी है। मानकों को ताक पर रखकर खनन किया जा रहा है।
भूजल के अधिक दोहन से भी पर्यावरण प्रभावित हो रहा है। नतीजतन चित्रकूटधाम मंडल के 5 ब्लाक पानी की कमी से ‘डार्क जोन’ घोषित हो गए। इनमें बांदा से तिंदवारी व बड़ोखर खुर्द, महोबा से पनवाड़ी व जैतपुर और चित्रकूट से रामनगर ब्लाक शामिल है।
आशीष ने बताया कि अगले माह जुलाई में बांदा जनपद के नरैनी क्षेत्र में 200 बरगद और पीपल के पौध रोपे जाएंगे। यह काम इस क्षेत्र के अध्यापक यशवंत पटेल की अगुवाई में होगा। इन पौधों को रोपने के इच्छुक 90 परिवारों के नाम अब तक हमारे पास आ चुके हैं।