कॉलेज की फीस और खाद-बीज के लिए तीन दिन से बैंक में लाइन लगा रहे छात्र को रुपये नहीं मिले तो उसने फांसी लगाकर जान दे दी। घटना से गुस्साए ग्रामीणों ने बैंक पर पथराव कर दिया। बैंक के लोगों ने ही किसी तरह भीड़ का शांत कराया। इस बाबत पुलिस का कहना है कि छात्र ने डिप्रेशन में आकर आत्महत्या की है।
शहर कोतवाली क्षेत्र के मवई बुजुर्ग गांव का सुरेश (18) पुत्र लल्लू प्रजापति, रामसेवक शिवहरे डिग्री कालेज, पचनेही में बीएससी द्वितीय वर्ष का छात्र था। मंगलवार को वह गांव स्थित इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक से रुपये निकालने गया था। दोपहर तक लाइन में लगने के बाद अपनी जगह भांजे को खड़ा कर पिता को लेने घर चला गया। पिता का बैंक में अलग खाता है।
उसने उन्हें भी लाइन में लगने को कहा। पिता लल्लू ने बताया कि वे बैंक जाने के लिए तैयार होने लगे। इसी दौरान सुरेश ने मां की साड़ी से कमरे में फांसी लगा ली। उसे बुलाया, जवाब नहीं मिला तो कमरे में जाकर देखा। तत्काल फंदे से उतारकर उसे जिला अस्पताल लाए। यहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। परिजन शव लेकर गांव चले गए।
घटना से नाराज ग्रामीणों ने बैंक में पत्थरबाजी कर दी। पुलिस ने पंचनामे के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक के पिता का कहना है कि सुरेश को कालेज की फीस के लिए रुपयों की जरूरत थी। खेती के लिए भी खाद-बीज खरीदना था। तीन दिन से वह रोज लाइन में लगता था। बारी आने तक रुपये खत्म बताकर वापस कर दिया जाता था।
इसी से परेशान होकर उसने जान दे दी। उधर, शाखा प्रबंधक पुलकित सचान का कहना है कि उन्हें प्रतिदिन जितने रुपये मिलते हैं, बांट देते हैं। मांग से कम रुपये मिल रहे हैं। इससे एक दिन में सभी को रुपये देना संभव नहीं है। छात्र उनसे नहीं मिला। इस संबंध में शहर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक केपी सिंह ने बताया कि पिता लल्लू प्रजापति ने सूचना दी है कि उनका पुत्र सुरेश काफी दिनों से बीमार और डिप्रेशन में था। बैंक प्रबंधक ने बताया कि छात्र के खाते में सिर्फ 690 रुपये हैं। डिप्रेशन में उसने आत्महत्या की है।
दूसरी ओर हमीरपुर के भरुआसुमेरपुर की सहकारी समिति में 10 रुपये के सिक्के लेकर गए किसान को खाद-बीज देने से इनकार कर दिया गया। शिकायत मिलने पर पुलिस ने हस्तक्षेप किया तो उसे खाद-बीज मिला। महोबा के खन्ना स्थित इलाहाबाद ग्रामीण बैंक में पैसा न होने से खफा ग्रामीणों ने बैंक के सामने हाईवे जाम कर दिया। खन्ना थानाध्यक्ष ने ग्रामीणों को किसी तरह समझा-बुझाकर घंटे भर बाद जाम खुलवाया।