रुपये के लिए बैंक में उपभोक्ताओं की लाइन
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जान जाने के बाद बैंक प्रशासन जाग गया। उपभोक्ताओं का हंगामा और बैंककर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट ने बैंक प्रबंधन की नींद काफूर कर दी। आनन-फानन में बैंक स्टाफ बढ़ा दिया गया। इतना ही नहीं सुबह से ग्रामीणों को कैश मिलने लगा। ग्राम प्रधान ने लाउडस्पीकर की व्यवस्था करा दी है।
सोमवार को इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक में तीन वर्षीय पुत्री के इलाज के लिए बैंक मेें लाइन लगाए दलित धर्मेंद्र वर्मा की पुत्री अंकिता ने बाबा की गोद में दम तोड़ दिया था। इससे आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने बैंक के सामने शव रखकर हाईवे जाम कर दिया था। तीन बैंककर्मियों के विरुद्ध नामजद रिपोर्ट दर्ज हो जाने के बाद ग्रामीणों और परिजनों का गुस्सा शांत हुआ।
इस बवाल और बैंककर्मियों पर गैर इरादतन हत्या की रिपोर्ट का असर अगले ही दिन मंगलवार को दिखाई पड़ा। बैंक प्रबंधन ने यहां अतिरिक्त स्टाफ तैनात कर दिया है। सुबह नौ बजे से ही कैश वितरण शुरू हो गया। ग्राम प्रधान हेमलता सिंह ने बैंक में लाउडस्पीकर की व्यवस्था कराई है, ताकि लोगों को बारी-बारी से बुलाया जा सके।
डड़वाहार की गुड़िया को पांचवें दिन 2000 रुपये मिले। वह इलाज कराने तिंदवारी गई है। अमलीकौर के भोली सिंह को चौथे दिन पैसा मिला है। वह भी इलाज के लिए जा जा रहे हैं। कई किसानों को खाद, बीज के लिए पैसा मिल गया है।