बांदा। मारपीट के बाद हुई मौत के मामले में विवेचना के दौरान साक्ष्यों को मिटाकर आरोपियों को बचाने पर न्यायालय ने तीन सीओ और अपराध शाखा के निरीक्षक, डॉक्टर समेत नौ लोगों को तलब किया है। इसके अलावा आरोपियों को भी धारा 302 का मुल्जिम बनाया गया है।
शहर कोतवाली क्षेत्र के आवास विकास कॉलोनी में 18 जून 2022 को अभिषेक सिंह (32) की नाली के विवाद में डंडा और फावड़ा मारकर हत्या कर दी गई थी। मृतक की बहन प्रतिमा सिंह ने अपने दूसरे भाई नगर कोतवाली में गौरव सिंह (लेखपाल), उसकी पत्नी दीप्ति सिंह (भाभी) और एक अज्ञात के विरुद्ध धारा 302, 323, 504, 506 के तहत केस दर्ज कराया था। इसके कुछ दिन बाद प्रतिमा सिंह ने बांदा कोतवाली पुलिस पर आरोपियों से मिलीभगत का आरोप लगाया तो डीआईजी के आदेश पर विवेचना अपराध शाखा महोबा स्थानांतरित कर दी गई।
बताया जाता है कि महोबा में ही विवेचना के दौरान धारा 302 हटाकर आरोपियों के विरुद्ध धारा 323, 504 व 506 में न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर दी गई। इसका पीड़िता ने विरोध किया। कहा कि डॉक्टर और पुलिस ने मिलकर हत्या के साक्ष्य मिटाकर आरोपियों को बचाने का प्रयास किया है। बताया कि डॉक्टर ने सही पोस्टमार्टम नहीं किया। पंचायतनामा और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आंतरिक चोटें दर्ज थीं, लेकिन मौत का कारण स्पष्ट नहीं किया गया। गवाहों के बयानों को गलत लिखा गया। इसके बाद मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने पीड़िता की याचना पर जी.खान मेडिकोलीगल लखनऊ को कोर्ट में बुलाया।
उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार मृतक के फेफड़ों में खून का थक्का मिला है। इससे चोट के कारण स्पष्ट होते हैं। चिकित्सक ने सही से पोस्टमार्टम नहीं किया। मेडिकोलीगल व पीड़िता के बयानों के बाद कोर्ट ने आरोपी आवास विकास काॅलोनी निवासी गौरव सिंह, उनकी पत्नी दीप्ति सिंह को धारा 302/34 व तत्कालीन डॉ. योगेश श्रीवास्तव, डॉ. अरविंद कुमार के साथ प्रभारी निरीक्षक कोतवाली नगर बांदा राघवेंद्र सिंह, उप निरीक्षक कोतवाली नगर बांदा धर्मेंद्र सिंह, क्षेत्राधिकारी बांदा अंबुजा त्रिवेदी को तलब किया है।
इसी तरह अपराध शाखा महोबा के निरीक्षक राजेश कुमार, ईश्वरचंद्र राय, सीओ चरखारी अजय अग्रवाल, सीओ सिटी महोबा रामप्रवेश राय, सीओ लाइन महोबा हर्षिता गंगवार, सीओ लाइन महोबा उमेशचंद्र को धारा 120-बी, 218, 201-34 आईपीसी के तहत न्यायालय ने सभी को दो अप्रैल को तलब किया है।