बुंदेलखंड के चार जिलों में बेतवा नदी किनारे दोनों ओर 100 मीटर की दूरी तक बालू खनन पर रोक लगा देने से चित्रकूटधाम मंडल की केन, यमुना और अन्य नदियों में खनिज का दबाव कई गुना बढ़ने के आसार हैं। हमीरपुर और उरई जिलों में बेतवा नदी की लगभग 134 खदानें बंद हो जाएंगी। दोनों जिलों में लगभग चार अरब रुपये सालाना खनिज राजस्व की आमद ठप हो जाएगी।
उधर, बालू माफियाओं और कारोबारियों को यह चिंता सता रही है कि एनजीटी बेतवा की तर्ज पर केन और यमुना नदियों में भी यह पाबंदी लागू न कर दे। एनजीटी, नई दिल्ली ने कुछ दिनों पूर्व अपने आदेश संख्या-ओए 673/2018 में आदेश पारित किया है। इस आदेश का हवाला देकर सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग उत्तर प्रदेश, झांसी के मुख्य अभियंता (बेतवा) महेश्वरी प्रसाद ने हाल ही में निर्देश जारी किए हैं।
इसमेें शासनादेश का भी हवाला शामिल करते हुए कहा है कि ललितपुर, झांसी, जालौन, हमीरपुर तक बेतवा नदी के दोनों किनारों से 100-100 मीटर दूरी तक किसी प्रकार का निर्माण, अतिक्रमण, व्यवसायिक गतिविधियां, पट्टा नीलामी, प्रदूषण करने वाली गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है। इस क्षेत्र को फ्लड प्लेन जोन घोषित किया गया है। मुख्य अभियंता के आदेश पत्र में ललितपुर, झांसी, जालौन और हमीरपुर में बेतवा नदी किनारे 100 तक क्षेत्र में सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता को मौके पर चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं।
इस क्षेत्र को फ्लड जोन के रूप में संरक्षित करने को कहा है। यहां चल रही गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से बंद और विस्थापित करने के निर्देश दिए हैं। डीएम के माध्यम से शासनादेश के माध्यम से प्रभावी कार्रवाई को कहा है। उधर, हमीरपुर और जालौन जिलों में बेतवा नदी की खदानों से खनन प्रतिबंधित हो जाने पर चित्रकूटधाम मंडल की केन नदी का खनन का दबाव काफी बढ़ जाने के आसार बढ़ जाएंगे। बांदा, चित्रकूट में स्थित केन, यमुना, बागै आदि नदियों में खनन कई गुना बढ़ जाएगा। हमीरपुर और उरई की भरपाई यहां से की जाएगी।