बांदा। शहर के नालों का गंदा पानी बिना जैविक शोधन केन नदी में गिराया जा रहा है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग की रिपोर्ट पर एनजीटी ने नगर पालिका पर 2.60 करोड़ रुपये जुर्माना किया है। साथ ही इसमें सुधार करने की हिदायत दी है।
शहर के सभी 31 वार्डों का घरों और होटलों से निकलने वाला गंदा पानी 46 बड़े और 104 छोटे नालों के जरिए केन नदी में गिराया जा रहा है। इनमें सभी नाले पंकज और निम्नी नाला में मिलते हैं। नालों से केन नदी में पानी गिराया जाता है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के सख्त निर्देश हैं कि शहर के नालों का पानी जैविक शोधन के बाद ही नदी में गिराया जाए।
नगर पालिका के अधिकारियों का दावा भी है कि पानी जैविक शोधन के बाद ही केन नदी में गिराया जा रहा है। उधर, सामाजिक कार्यकर्ता की शिकायत पर एनजीटी ने प्रदूषण नियंत्रण विभाग से मामले की जांच कराई। विभाग की आख्या के आधार पर एनजीटी ने नगर पालिका पर 2.60 करोड़ रुपये का जुर्माना किया है और स्पष्टीकरण मांगा है।
बताया गया कि पंकज नाला शहरी क्षेत्र से करिया नाला में मिला है। यह हनुमान मंदिर से होते हुए केन नदी में गिरता है। इसमें कोई जैविक शोधन की व्यवस्था नहीं है।
निम्नी नाला राजघाट के पास से केन नदी में गिरता है। करिया नाला से नदी में गिरने वाले गंदे पानी का जैविक शोधन नहीं किया जा रहा है।
नगर पालिका ईओ श्रीचंद्र चौधरी ने बताया कि नोटिस मिला है। इसका जवाब भेजा जा रहा है।