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यौन उत्पीड़न की खबरों पर एनजीओ जांच के घेरे में

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बांदा। चित्रकूटधाम मंडल के पाठा क्षेत्र में आदिवासियों की किशोर उम्र बेटियों के कथित यौन उत्पीड़न की खबरें मीडिया और सोशल मीडिया पर आने के बाद प्रदेश सरकार ने डैमेज कंट्रोल की कवायदें शुरू कर दी हैं। एक तरफ जहां इस प्रकरण की जांच के लिए कर्वी के एसडीएम की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की गई है तो दूसरी तरफ यह गुपचुप ढंग से जांच कराई जा रही है कि इस खबर के पीछे कौन है? शक की सुई इसी क्षेत्र के कुछ स्वयंसेवी संगठनों पर है।
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पिछले 24 घंटे के दौरान बांदा व चित्रकूट के कुछ चुनिंदा स्वयंसेवी संगठनों के मुखिया को पुलिस ने गुपचुप ढंग से उठाकर पूछताछ की है।
चित्रकूट जिले के भरतकूप क्षेत्र में पहाड़ों पर पत्थर तोड़ने और क्रशर में लगे आदिवासी मजदूरों की बेटियों के कथित यौन उत्पीड़न का मामला काफी गरमाया हुआ है। क्षेत्रीय राजनीतिक नेता और जनप्रतिनिधि भी इसमें कूद पड़े हैं। दलीलें दे रहे हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भी ट्वीट कर इस मुद्दे पर सरकार को घेरने से नहीं चूके।
उधर, प्रशासन इस जांच में भी जुटा हुआ है कि यह शिगूफा छोड़ा किसने? खबरों के पीछे किनका हाथ है? इसी के चलते बीते दो दिनों में मानिकपुर (चित्रकूट) और बांदा के कई एनजीओ के मुखिया को उठाकर उनसे पूछताछ की गई।
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शनिवार को अतर्रा (बांदा) से एक स्वयंसेवी संगठन के मुखिया को चित्रकूट की पुलिस गुपचुप ढंग से ले गई और कई घंटे पूछताछ की। इस दौरान उनके मोबाइल बंद रखे गए। आदिवासी क्षेत्रों में पहुंचे महिला संगठनों की महिलाएं भी शक के दायरे में हैं।
उधर, मंडलायुक्त गौरव दयाल ने बताया कि कर्वी के एसडीएम की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की गई है। समिति जांच कर रही है। जल्द ही रिपोर्ट देगी। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।
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