अधिकारियों और कर्मचारियों की हीलाहवाली से सुप्रीम कोर्ट द्वारा पॉलिथीन पर पूरी तरह लगाया गया प्रतिबंध चित्रकूटधाम मंडल में फ्लाप साबित हो रहा है। यहां कुछ दिनों तक तो अफसरों-कर्मियों ने पॉलिथीन के खिलाफ धरपकड़ अभियान चलाया, पर कुछ दिनों बाद विभागों के अधिकारियों ने चुप्पी साध ली, जिससे अब फिर से धड़ल्ले से लोगों के हाथों में पॉलिथीन देखी जा रही है।
छापेमारी कार्रवाई के नाम पर महज औपचारिकता निभाने के बाद अभियान को इतिश्री करने से व्यापारी भी अब लोगों को फिर से धड़ल्ले से पॉलिथीन पर सामान देने से गुरेज नहीं कर रहे हैं। अधिकारी भी शासन-प्रशासन को कुछ छापेमारी और पॉलिथीन बरामदगी के आंकड़े भेजकर शांत हो गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद प्रदेश सरकार ने पूरे प्रदेश में सभी तरह की पॉलिथीन पर रोक लगा दी थी।
प्रतिबंध लगने के बाद शुरुआती कुछ दिनों में जिला प्रशासन और स्थानीय निकायों के अधिकारियों और टीमों ने पॉलिथीन के विरुद्ध अभियान चलाए। चंद दिन चली यह रस्म अदायगी अब पूरी तरह से ठंडी पड़ गई है। धरपकड़ के दौरान पॉलिथीन के इस्तेमाल में आई कमी अब पहले जैसी बहाल हो गई है। फुटपाथी दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारी तक बेखौफ और बेरोकटोक पॉलिथीन के थैलों में सौदा दे रहे हैं, जबकि अब पॉलिथीन का उपयोग पूरी तरह अपराध है।
इसमें जेल और जुर्माने का भी प्रावधान है। पॉलिथीन के थोक विक्रेता के अनुसार, प्रतिबंध के बावजूद सिर्फ बांदा शहर में प्रतिदिन लगभग एक क्विंटल पॉलिथीन की खपत हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में 60 से 70 किलो पॉलिथीन का इस्तेमाल हो रहा है। मौजूदा समय में तो हाल यह है कि जैसे इस पर कोई रोक ही नहीं लगी। धड़ल्ले से बिक्री और इस्तेमाल चल रहा है।
गांधी जयंती से पॉलिथीन हो चुकी प्रतिबंधित
पिछले माह गांधी जयंती 2 अक्तूबर से प्रदेश में सभी तरह की पॉलिथीन कैरी बैग (पैकेजिंग मैटेरियल को छोड़कर) रोक लगा दी गई है। अब इसके प्रयोग, निर्माण, बिक्री, वितरण, भंडारण, परिवहन, आयात व निर्यात आदि सभी प्रतिबंधित कर दिया गया है। नगर विकास विभाग ने सभी नगर निकायों को इसके आदेश जारी करते हुए प्रतिबंधित पॉलिथीन सामग्री के विरुद्ध अभियान चलाने के निर्देश दिए थे।
इसकी अधिसूचना प्रदेश सरकार जुलाई में ही जारी कर चुकी है। पर्यावरण को हो रहे नुकसान से बचने के लिए वर्ष 2000 में यूपी सरकार ने उत्तर प्रदेश प्लास्टिक और अन्य जीव, अनाशित कूड़ा-कचरा (उपयोग एवं निस्तारण का विनियमन) अधिनियम लागू किया था, लेकिन बहुत प्रभावशाली साबित नहीं हुआ। इसी के बाद यह नया आदेश हुआ।
प्रतिबंध के बाद भी पॉलिथीन का इस्तेमाल करने या बेचने आदि पर कार्रवाई का अधिकार और जिम्मा कई विभागों को दिया गया है। पिछले दिनों सूबे के नगर विकास विभाग की अधिसूचना में यह अधिकार जिला प्रशासन, नगर निकाय, स्वास्थ्य, प्रदूषण नियंत्रण, वन, खाद्य एवं आपूर्ति, औद्योगिक विकास, खाद्य सुरक्षा और पर्यटन विभागों को दिया गया है। जिला प्रशासन ने नायब तहसीलदार तक को कार्रवाई के लिए अधिकृत किया गया है।
उल्लंघन पर जेल और जुर्माने का प्राविधान
पूरी तरह प्रतिबंध के बाद अब पॉलिथीन और प्लास्टिक की सामग्री का प्रयोग करते पकड़े जाने पर पहली बार एक माह तक की कैद या एक हजार से 10 हजार रुपये तक का जुर्माना होगा। दूसरी बार पकड़े जाने पर छह माह की जेल या 5 से 10 हजार रुपये तक जुर्माना होगा। प्लास्टिक के कैरी बैग की बिक्री, वितरण, उत्पादन, भंडारन और परिवहन पर पहली बार पकड़े जाने पर छह महीने की जेल या 10 से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना, जबकि दूसरी बार उल्लंघन पर एक वर्ष की कैद और 10 हजार से एक लाख रुपये तक जुर्माने का प्राविधान है।
प्रतिबंध से दोगुना महंगी हुई पॉलिथीन
प्रतिबंध के बाद पॉलिथीन और डिस्पोजल बर्तन के दामों में भी दोगुना इजाफा हुआ है। 50 माइक्रॉन की पॉलिथीन 100 रुपये के स्थान पर अब 180 रुपये किलो और डिस्पोजल बर्तन 80 रुपये के स्थान 100 रुपये सैकड़ा बिक रहे हैं।
मंडल में धरपकड़ और बरामदगी के सरकारी आंकड़े
जिला छापेमारी जब्त (किलो) जुर्माना
बांदा 120 40 2000
चित्रकूट 62 35 00
हमीरपुर 42 21 00
महोबा 82 32 00
योग 306 128 2000
पॉलिथीन की रोकथाम के लिए नगर पंचायत स्तर पर टीमें गठित हैं। जल्द अभियान की समीक्षा कर प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
प्रदीप कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट/प्रभारी अधिकारी स्थानीय निकाय बांदा