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न पानी न बिजली, कैसे बचाएं धान

Wed, 05 Oct 2016 11:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
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हाथियों के झुंड द्वारा रौंदी गई धान की फसल दिखाता काश्तकार। - फोटो : अमर उजाला
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बांदा। बीता साल सूखा झेलने के बाद इस वर्ष चित्रकूटधाम मंडल में धान का उत्पादन बेहतर होने की उम्मीद है। चारों जनपदों में 59 हजार हेक्टेयर में धान बोया गया है। 1.13 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य था। कृषि विभाग के अधिकारी लक्ष्य से ज्यादा उत्पादन का कयास लगा रहे हैं। अभी तक धान की फसल के लिए मौसम माकूल रहा है। अब तेज धूप में खेतों से नमी गायब हो रही है। गंधी व सैनिक कीट के फसलों को नुकसान पहुंचाने का खतरा बढ़ गया है। खेतों में नमी बनाए रखने के लिए किसानों को परेशानी हो रही है, क्योंकि नहरों में पानी नहीं है और नलकूप बिजली कटौती से ठप हैं।
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चित्रकूटधाम मंडल में मुख्यत: बांदा और चित्रकूट में ही धान की फसल होती। महोबा और हमीरपुर में नलकूप वाले कुछ किसानों ने धान लगा रखा है। मंडर में औसतन प्रति हेक्टेयर 55 से 60 कुंतल धान होता है लेकिन इस साल यह 60 से 70 कुंतल प्रति हेक्टेयर होने की उम्मीद है। कृषि विभाग के मुताबिक मंडल में 1,13,102 मीट्रिक टन धान का लक्ष्य है। बांदा में 45,835 हेक्टेयर में बुआई हुई है। यहां कृषि विभाग को इस साल लक्ष्य के मुताबिक 87,665 मीट्रिक टन धान उत्पादित होने की उम्मीद है। चित्रकूट जनपद में 13,085 हेक्टेयर में धान बोया गया है। यहां 25,244 मीट्रिक टन धान पैदा होने का लक्ष्य है। हमीरपुर में 73 हेक्टेयर में धान रोपा गया है।

यहां 159 मीट्रिक पैदावार का लक्ष्य है। महोबा में 18 हेक्टेयर में 34 मीट्रिक टन का लक्ष्य है। कृषि विभाग के मुताबिक इस बार मौसम माकूल है और लक्ष्य से ज्यादा धान का उत्पादन होगा। बांदा जनपद में अतर्रा, नरैनी, बबेरू, बिसंडा व बड़ोखर ब्लाक क्षेत्र में धान का उत्पादन होता है। यहां नहर ही सिंचाई का प्रमुख साधन हैं। बांदा सहित मुख्य ब्रांच में पानी नहीं है। धान उत्पादक दशरथपुरवा (नरैनी) के किसान रामकेश अग्निहोत्री ने बताया कि उनके 60 से 70 बीघे खेत में धान की फसल है। बताया कि बारिश की वजह से इस साल रोपाई में विलंब हुआ है। अब तक तो धान की फसल बेहतर है, पर आगे रोग का खतरा बढ़ा है। नहर में पानी न आने से सिंचाई का संकट है। धान के फसलों की नमी गायब रही है।
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