बांदा। इस्लामी कैलेंडर के आखिरी माह जिलहिज की 10वीं तारीख को मनाई जाने वाली ईदुज्जुहा (बकरीद) 1 अगस्त (शनिवार) को मनाई जाएगी। यह पहला मौका होगा जब बकरीद की नमाज ईदगाहों या मस्जिदों में भारी संख्या में सामूहिक रूप से अदा नहीं की जा सकेगी। लोग घरों पर ही इबादत करेंगे। ईदगाह और मस्जिद में गिने-चुने लोगों को ही अनुमति होगी। उधर, यह भी पहली बार हुआ है कि बकरीद के मौके पर हज का फर्ज अदा नहीं किया जा सका।
पूर्व संध्या पर शुक्रवार को बकरीद को लेकर सबसे ज्यादा हलचल कुर्बानी के जानवरों की खरीद फरोख्त की रही। शहर की नवाबी जामा मस्जिद, नवाब टैंक पशु मेला स्थल, कोतवाली के सामने इत्यादि मुकामों पर बकरों के बाजार लगे।
आम तौर पर बकरों का भाव 15 से 25 हजार रुपये के बीच रहा। कुर्बानी के लिए खरीदे या पाले गए बकरों की आखिरी दिन खातिर तवाजो भी खूब हुई। खासकर बच्चे उनके साथ खेलते रहे। इस्लामी शर्त के मुताबिक यह बकरे एक साल की उम्र से ज्यादा और हर तरह से तंदरुस्त हैं। शरीर का कोई भी अंग कटा या टूटा नहीं है। न ही कोई बीमारी है।
शहर काजी मौलाना कमरुद्दीन ने बताया कि कुर्बानी तीन दिन (10, 11 व 12 जिलहिज) को होंगी। उन्होंने बताया कि पैगंबर हजरत इब्राहीम द्वारा अपने बेटे हजरत इस्माइल को कुर्बानी के लिए पेश किए जाने की याद में हर साल कुर्बानी का पर्व ईदज्जुहा मनाया जाता है।
कुर्बानी दिखावे या झूठी शान के लिए नहीं होनी चाहिए। कुर्बानी के जानवर को सजा संवारकर सड़कों या बस्ती में घुमाना नाजायज है। इस दिन गरीबों का पूरा ख्याल रखना चाहिए। साथ ही कोविड-19 के मद्देनजर गाइड लाइन का हर शख्स पूरी तरह पालन करें।
गले मिलने से परहेज, सेवइयों के साथ बचाव की डिश
बांदा। बकरीद की रस्मों पर कोरोना संक्रमण आडे़ आएगा। हालांकि मीठी सेवाइयों का जायका बरकरार रखने के लिए कुछ ऐहतियाती उपाय किए जा रहे हैं। ईद मिलन में गले मिलने से परहेज किया जाएगा।
कुछ घरानों में ईद मिलने आने वालों को संक्रमण से बचाने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग के बीच सेवाइयों के साथ संक्रमण से बचाव की डिश भी परोसी जाएंगी। कोल्डड्रिंक या ठंडा पानी के स्थान पर गर्म या कुनकुना नींबू मिलेगा। कुछ घरों में विशेष काढ़ा भी परोसने की तैयारी है।