बांदा : हस्त लिखित दुर्लभ रामचरित मानस की प्रति दिखाते साहित्यकार डा. चंद्रिका प्रसाद दीक्षित लल?
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बांदा। बेटी बचाओ और महिला सम्मान की चौतरफा चल रही मुहिम और चर्चाओं के बीच बुंदेलखंड के प्रसिद्ध साहित्यकार व अनुसंधानकर्ता डॉ. चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ‘ललित’ ने कहा है कि गोस्वामी तुलसीदास पर नारी निंदा का आरोप सर्वथा गलत है।
दावा किया कि रामचरित मानस की चित्रकूट से संवत 1867 की दुर्लभ हस्तलिपि प्रति उन्होंने खोजने में सफलता हासिल की है। यह प्राचीन निर्मित हस्त कागज पर काली स्याही से लिखी गई है। इसमें नारी स्वतंत्रता का संदर्भ है।
उन्होंने कहा कि तुलसीदास जी ने अपने इस दोहे- गतिविधि रची नारी जगमाही, पराधीन सपनेहु सुख नाहि में नारी स्वतंत्रता का समर्थन किया है चंद्रदास रिसर्च इंस्ट्ीटयूट के डायरेक्टर डॉ. ललित ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने नारी संवेदना को लेकर जो क्रांतिकारी संदेश मध्ययुग में प्रदान किया था, वह आज भी उतना ही सटीक और प्रासंगिक है।