चित्रकूट। शहरी निकाय में पालिका के सफाई कर्मी नाला-नालियों की सफाई के नाम पर लापरवाही बरत रहे हैं।
सफाई के बाद निकलने वाली गंदगी को घरों और दुकानों के सामने ही फेंक दिया जा रहा है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है। कई बार सफाई के बाद नालों पर पत्थर भी नहीं लगाए जा रहे हैं। खुले नालों से हर समय अनहोनी की आशंका बनी रहती है।
नगर पालिका परिषद चित्रकूट धाम में शहर में जलनिकास के लिए 36 नाले हैं। इनमें 11 बड़े नाले, 10 मझौले नाले और 15 छोटे नाले शामिल हैं। इसके अलावा, तीन सौ से अधिक छोटी नालियां भी बनी हुई हैं। मानसून आने से पहले अभियान चलाकर इन नालों-नालियों की सफाई हो चाहिए थी पर मानसून आने के बाद भी पालिका में नाला-नालियों की सफाई आधी-अधूरी है।
वर्तमान समय में पालिका क्षेत्र के नाला और नालियों की सफाई कार्य जारी है लेकिन नाले-नालियों की सफाई के बाद निकलने वाली गंदगी सड़क किनारे फेंकी जा रही है। हल्की सी बारिश होने पर यह गंदगी कीचड़ का रूप ले लेती है, जिससे लोगों को परेशानी होती है।
शहर के कसहाई मार्ग निवासी राजेश सिंह ने बताया कि नाला और नालियों की सफाई करने के बाद कर्मचारी घरों व दुकानों के सामने गंदगी लगा देते हैं। इससे लोगों को परेशानी होती है। दीनदयाल नगर के पप्पू गुप्ता ने बताया कि गल्ला मंडी के पीछे बसे मोहल्ले में जलभराव की समस्या बनी रहती है।
सुरेश कुमार व महेश ने बताया कि पांडेय कॉलोनी में भी नाले की सफाई में केवल खानापूर्ति की जाती है। इस कारण अधिक बारिश होने पर गली में पानी भर जाता है। खुले नालों से अनहोनी का खतरा बना रहता है।
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वर्जन
बड़े नालों की पूरी तरह से सफाई कराई जा चुकी है। कसहाई रोड और कर्वी पहाड़ी रोड में बने मझौले नालों की अधूरी सफाई हुई थी, अब यहां सफाई की जा रही है। नालों की सफाई के बाद गंदगी को हटवा जाता है। अगर कुछ गंदगी हटाई नहीं गई तो उसे हटवाया जाएगा।- लालजी यादव, ईओ, नगर पालिका परिषद