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कोरोना से बचाव की गारंटी पर ही कराएं नीट और जेईई

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बांदा। नीट और जेईई को लेकर चल रही देशव्यापी बहस में बांदा के प्रतिभागियों ने भी अपनी राय जताई है। इनमें ज्यादातर का कहना है कि कोरोना के मंडराते खतरे के बीच परीक्षा न कराई जाए। प्रतिभागियों की यह मंशा अमर उजाला द्वारा आयोजित वेबिनार में जाहिर हुई।
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दोनों परीक्षाएं सितंबर में प्रस्तावित हैं। अधिकांश परीक्षार्थियों ने प्रवेश पत्र भी डाउनलोड कर लिए हैं, लेकिन वह और उनके अभिभावक असमंजस की स्थिति से गुजर रहे हैं। इनका कहना है कि इन दिनों ट्रेनें नहीं चल रही हैं। जिन छात्रों का सेंटर दूसरे जिलों में उनके लिए प्राइवेट साधन करना जाना महंगा पड़ेगा। बसों से सफर करने में संक्रमण का खतरा है। रिश्तेदार भी
दिव्यांशी शिवहरे (आवास विकास) का कहना है कि कोरोना संक्रमण में सुधार न होने तक परीक्षा व्यवहारिक नहीं है। सरकार अगर परीक्षा कराती है तो स्वास्थ्य बीमा दिया जाए। सरकार को अपने फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए।
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छात्रा अदिति (अलीगंज) ने बताया कि उसका परीक्षा सेंटर कानपुर है। कोरोना संक्रमण काल में रिश्तेदार भी अपने यहां रुकने नहीं देते। ट्रेनें भी नहीं हैं। प्रस्तावित तिथियों में परीक्षा का देशव्यापी विरोध हो रहा है। सरकार को विचार करना चाहिए।
ईशु त्रिपाठी (अतर्रा) ने बताया कि 2 सितंबर को जेईई का पेपर है। प्राइवेट साधन महंगा है। बस से ही परीक्षा देने जाना पड़ेगा। होटल में भी इन दिनों इंट्री नहीं मिल रही। परीक्षा स्थगित कराने को पीएमओ कार्यालय व मुख्यमंत्री को ट्वीट किया है।
राज द्विवेदी (अतर्रा) का कहना है कि कई परीक्षा सेंटर कंटेनमेंट जोन में हैं। यह परीक्षार्थियों के लिए खतरे की घंटी है। तीन घंटे लगातार ग्लब्स और मास्क पहनकर परीक्षा देना दूभर है। सरकार को परीक्षार्थियों की सेहत की गारंटी लेना चाहिए।
नीट परीक्षार्थी कैफ अली (बांदा) ने बताया कि प्रवेश पत्र डाउनलोड तो कर लिया है, लेकिन मौजूदा समय में परीक्षा का पक्षधर नहीं है। सिर्फ मास्क और सैनिटाइजर से बचाव नहीं हो सकता। तमाम छात्र परीक्षा देने का साहस नहीं जुटा सकेंगे।
नीट परीक्षार्थी अदनान खां (अतर्रा) का कहना है कि कोरोना वैक्सीन आने तक परीक्षा नहीं होनी चाहिए। अधिकांश परीक्षार्थी और अभिभावक परीक्षा के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं हैं। सरकार को उनकी दशा पर ध्यान देना चाहिए।
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