नरैनी। तहसील मुख्यालय से 20 किलाेमीटर दूर नेढ़ुवा संपर्क पर बने रपटा से डेढ़ फीट ऊपर पानी बह रहा है। बारिश के दिनों में आवागमन ठप रहता है। गांव के लोग सरकारी सुविधाओं से वंचित हो जाते हैं। उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश के करीब 12 गांवों के लोग प्रतिदिन अपनी जान जोखिम में डालकर रपटा पार कर अपने गांवों को आते-जाते हैं।
तहसील के ग्राम नेढुवा में सन 1995 में लगभग 15 लाख रुपये की लागत से गहरार नाले के ऊपर रपटा का निर्माण कराया गया था। अधिक बरसात हो जाने पर इस रपटा में पानी का बहाव इतना तेज रहता है जल्द कोई व्यक्ति इसे पार करने की हिम्मत नहीं कर पाता। अधिक वर्षा हो जाने पर गांव के विकास कार्य, शिक्षा, चिकित्सा पूरी तरह से ठप जाती है। अगर कोई व्यक्ति बीमार पड़ जाए तो उसकी मरने जीने की लग जाती है। उसको रपटा पार कराने में भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है।
बाढ़ आ जाने पर नाव की सुविधा न होने की वजह से बीमार व्यक्ति को कढ़ाई व ट्यूब के सहारे ही जान जोखिम में डालकर इस पार 20 किमी दूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नरैनी आना पड़ता है । गांव के अनिल पांडे, नत्थू, सुशील कुमार, विनय, संजय ,राजू ,लक्ष्मी प्रसाद, संतोष पटेल, राजाराम, राममनोहर, बारवलाल, सहित आदि लोगो ने बताया कि गहरार नाले पर पुल न होने से बड़ैछा, मोहन पुरवा, सलामतपुर, चुनबाद का पुरवा, चंदपुरा के अलावा समीपस्थ मध्य प्रदेश के आधा दर्जन ग्रामीण प्रतिदिन अपनी जान जोखिम में डालकर नहरी व नरैनी आ पाते आते हैं। इस गंभीर समस्या से जूझ रहे नेढुवा गांव के लोगों ने भारी आक्रोश है ।