बांदा। बारिश ने जिले की सड़कों की बदहाली को और उजागर कर दिया है। कई प्रमुख और संपर्क मार्गों पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं।
बारिश का पानी भरने से इनकी गहराई का अंदाजा भी नहीं लग पाता। ऐसे में बाइक सवार अचानक गड्ढे में गिरकर चोटिल हो रहे हैं जबकि कार और अन्य वाहन भी फंस रहे हैं। लोगों का कहना है कि जिम्मेदारों से ही पूछा जाए कि सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क।
हालात यह हैं कि रात के समय खतरा और बढ़ जाता है। खास बात यह है कि कुछ सड़कों पर गड्ढे बीच सड़क में हैं, जहां वाहन चालक सामान्य रफ्तार से चलते हुए अचानक उनमें गिर जाते हैं लेकिन जिम्मेदार विभाग इस ओर भी गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।
बारिश के कारण सड़क की स्थायी मरम्मत में तकनीकी दिक्कत हो सकती है लेकिन हादसे रोकने के लिए गड्ढों को अस्थायी रूप से भरना जरूरी है। खासकर उन स्थानों पर जहां सड़क के बीच गहरे गड्ढों में पानी भरा है।
ऐसे स्थानों पर संकेतक लगाने या बैरिकेडिंग करने से भी वाहन चालकों को खतरे का पता चल सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग को बारिश खत्म होने का इंतजार करने के बजाय फिलहाल ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे किसी बड़े हादसे को टाला जा सके।
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तिंदवारी-बगिया मार्ग पर बीच सड़क में गड्ढे
तिंदवारी। बांदा-राष्ट्रीय राजमार्ग से तिंदवारी को जोड़ने वाले तिंदवारी-बगिया मार्ग पर जगह-जगह बड़े गड्ढे हो गए हैं। सीधी और देखने में ठीक नजर आने वाली सड़क के बीच बने गड्ढे दूर से दिखाई नहीं देते।
बारिश के बाद इनमें पानी भर जाने से स्थिति और खतरनाक हो गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार कई बार वाहन चालक अचानक गड्ढे में गिरकर चोटिल हो चुके हैं। सड़क पर वाहनों की रफ्तार अधिक होने के कारण अचानक गड्ढा सामने आने पर चालक को संभलने का मौका नहीं मिलता।
लोगों का कहना है कि ठीक दिखने वाली सड़क के बीच बना गड्ढा ज्यादा खतरनाक है। विभाग को हादसा होने का इंतजार करने के बजाय तत्काल गड्ढों को भरवाना चाहिए। (संवाद)
नरैनी-करतल मार्ग पर जानलेवा गड्ढे
करतल। लोक निर्माण खंड-एक के अंतर्गत नरैनी-करतल मुख्य मार्ग पर नहरी और अकेलवा के बीच जलभराव से बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। पानी भरे होने के कारण इनकी गहराई का पता नहीं चलता। इससे वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
यह मार्ग उत्तर प्रदेश को मध्य प्रदेश तथा बांदा को पन्ना से जोड़ता है। दिन-रात सैकड़ों वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं। इनमें स्कूली वाहनों के अलावा एंबुलेंस और सरकारी वाहनों की आवाजाही भी होती है। लोक निर्माण खंड-एक के अवर अभियंता अंकित कुमार ने बताया कि मार्ग का कार्य वन विभाग की अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) न मिलने के कारण रुका है।
यह संरक्षित भूमि का क्षेत्र है। एनओसी मिलते ही कार्य शुरू कराया जाएगा। वनरक्षक अंकित कुमार पटेल ने बताया कि एनओसी भारत सरकार से मिलनी है और इसकी प्रक्रिया चल रही है। (संवाद)
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कैरी गांव में सड़क पर भरा पानी
बबेरू। बिसंडा क्षेत्र के कैरी गांव में सड़क पर जलभराव से ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी हो रही है। जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण बारिश का पानी सड़क पर भर जाता है। पानी भरने से सड़क पर बने छोटे-बड़े गड्ढे दिखाई नहीं देते और राहगीरों को संभलकर निकलना पड़ता है।
ग्रामीणों के अनुसार सबसे अधिक परेशानी छोटे बच्चों को स्कूल आने-जाने में होती है। लंबे समय तक पानी जमा रहने से आसपास गंदगी और बीमारियों का खतरा भी बना रहता है। पीसी पटेल, रमेश, गोरेलाल सहित ग्रामीणों ने जल्द जल निकासी की व्यवस्था कराने की मांग की है। (संवाद)
फोटो-15-तिंदवारी-बगिया मार्ग पर हुए बड़े-बड़े गड्ढे और गुजरते बाइकसवार। संवाद