बांदा। अरबों रुपये की लागत से तैयार रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज और करोड़ों की लागत वाले जिला अस्पताल में एमआरआई की सुविधा नहीं है। मरीज पांच से छह हजार रुपये खर्च कर प्राइवेट डायग्नोस्टिक केंद्रों पर जांच कराने को मजबूर हैं। अस्पताल प्रबंधन की ओर से शासन को बार बार चिट्ठियां लिखी जा रही हैं, लेकिन सुनवाई नहीं है। जनप्रतिनिधियों को भी इस महत्वपूर्ण चिकित्सा सुविधा की सुध नहीं है।
रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज मेें पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत एमआरआई मशीन लगाने की प्रक्रिया काफी समय से चल रही है, लेकिन अभी तक नहीं लग पाई है। यही स्थिति जिला अस्पताल की है। जिला अस्पताल में तो वर्ष 2019 में एमआरआई सुविधा के लिए ही नया भवन बनाया गया। मगर यहां भी अभी तक संचालन शुरू नहीं हो सका है। मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में रोजाना 20 से 25 मरीजों की एमआरआई कराई जा रही है। मेडिकल कॉलेज होने की वजह से यहां हमीरपुर, महोबा, चित्रकूट के अलावा अन्य जिलों के भी मरीज आते हैं। डॉक्टर मरीजों को चुनिंदा केंद्रों पर ही जांच कराने को मजबूर करते हैं।
कॉलेज में एमआरआई और सीटी स्कैन की स्थापना पीपीपी मॉडल के तहत होनी है। शासन स्तर पर प्रक्रिया चल रही है। टेंडर हो चुके हैं। प्राइवेट एजेंसी की सहमति के बाद दोनों सेवाएं शुरू हो सकेंगी। निदेशालय को रोजाना आने वाले मरीजों की संख्या की जानकारी दी जा रही है।
डॉ. मुकेश कुमार यादव, प्रधानाचार्य, रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज
एमआरआई मशीन की स्थापना के लिए शासन से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। जून में महानिदेशक को पत्र भेजकर एमआरआई सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की थी। यहां भी पीपीपी मॉडल के तहत मशीन लगनी है। डॉ. एसएन मिश्र, सीएमएस, जिला अस्पताल
सीएम और डिप्टी सीएम से की है मांग
सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी ने बताया कि उनकी पहल पर जिला अस्पताल में एमआरआई भवन तैयार हो गया है। मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक से एमआरआई मशीन की मांग की है।