बांदा। बरियारपुर बांध में यूपी की नियंत्रण वाली भूमि पर एमपी द्वारा बनवाई जा रही नहर का विवाद उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव तक पहुंच गया है। बांदा के डीएम ने प्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर कहा कि मध्य प्रदेश ने नहर बनाकर केन नदी से पानी ले लिया तो जिले में न सिर्फ पानी का गंभीर संकट होगा, बल्कि पेयजल को लेकर कानून एवं शांति व्यवस्था भी बिगड़ सकती है।
डीएम योगेश कुमार ने मुख्य सचिव को भेजे पत्र में कहा कि मध्य प्रदेश का जल संसाधन विभाग बरियारपुर बीयर के अपस्ट्रीम में नहर बनाकर केन नदी का पानी मझगवां बांध ले जाना चाहता है। यह काम यूपी की नियंत्रण वाली भूमि में बिना किसी सूचना या सहमति के शुरू कर दिया गया है।
मेरे निर्देश पर सिंचाई विभाग बांदा के अधिशासी अभियंताओं ने मौके का निरीक्षण किया और अभिलेख देखे। एमपी के जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक भी की। एमपी के अधिकारी भूमि एवं जल बंटवारे से संबंधित उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दिए गए अनापत्ति या सहमति के अभिलेख नहीं पेश कर पाए। इस कारण नहर खुदाई का काम रुकवा दिया है।
मुख्य सचिव को बताया कि बरियारपुर बीयर का रखरखाव उत्तर प्रदेश करता है। यहां से निकलने वाली नहर से बांदा में सिंचाई होती है। बरियारपुर पानी के बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों के बीच 1977 में उच्चस्तरीय समझौते की प्रति भी डीएम ने पत्र के साथ भेजी है।
पत्र में कहा कि यदि मध्य प्रदेश नहर खोदकर केन नदी का पानी मझगवां बांध में ले जाता है तो बांदा को मिलने वाले पानी की मात्रा नगण्य हो जाएगी। इससे जिले में केन नदी से आपूर्ति किए जाने वाले क्षेत्रों में पानी का संकट और गंभीर हो जाएगा। कानून एवं शांति व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होने की समस्या से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
भूमि खरीदे बिना एमपी नहीं बना सकता नहर
बांदा। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग (बांदा) के अधीक्षण अभियंता डीएस सचान ने मंगलवार की शाम मध्य प्रदेश के सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ बरियारपुर में खोदी जा रही नहर स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि मौजूदा स्थितियों और शर्तों में मध्य प्रदेश यूपी के नियंत्रण वाली भूमि पर नहर नहीं बना सकता।
उसे जमीन चाहिए तो शासन स्तर पर प्रयास कर यह जमीन खरीद सकता है। इसमें उच्चस्तरीय समझौता ही काम करेगा। अधीक्षण अभियंता ने कहा कि फिलहाल वे एमपी को नहर की खुदाई नहीं करने देंगे। उधर, मध्य प्रदेश सिंचाई विभाग के उप यांत्रिक (पन्ना) एमके दोहरे ने बताया कि विवाद सिर्फ पांच हेक्टेयर भूमि का है।
1965 में हुए समझौते के मुताबिक बरियारपुर में 285 हेक्टेयर जमीन यूपी के अधिकार में दी गई है। उन्होंने कहा कि यही समझौता नहर निर्माण में आड़े आ रहा है। दोनों सूबों के उच्चाधिकारियों तक यह मामला पहुंच गया है। वहीं से निर्णय होगा।