फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रेलवे स्टेशन पर सीसीटीवी कैमरों से शुरू हुई निगरानी

विज्ञापन
विज्ञापन
रेलवे स्टेशन में उच्च श्रेणी व हाई रिजुलेशन के 40 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए है। अपराधियों पर दिन रात नजर रखने के लिए आरपीएफ थाने में कंट्रोल रूम बनाया गया है। चित्रकूट और महोबा में भी कैमरा लगाने का काम शुरू हो गया है।
विज्ञापन

निर्भया योजना के तहत देश के पांच सैकड़ा रेलवे स्टेशनों में सीसीटीवी कैमरा लगाया जाएगा। इसमें तीन हजार करोड़ का खर्च आएगा। प्रथम श्रेणी के स्टेशन में 40 व द्वितीय श्रेणी में 20 कैमरे लगाए जा रहे है। कैमरा लगाने की जिम्मेदारी रेल टेल कंपनी को दी गई है। कंपनी के प्रबंधक कृष्ण कुमार ने बताया कि बांदा रेलवे स्टेशन में 200 मीटर की उच्च क्षमता वाले तीन पीटी जेट, 60 मीटर की क्षमता वाले 37 बुलेट व डोम सीसीटीवी कैमरे लगाए गए है।
महोबा व चित्रकूट में भी कैमरा लगाने का काम शुरू कर दिया गया है। सहायक प्रबंधक आरपी दीक्षित ने बताया कि कैमरे की मानीटरिंग कंपनी के मुख्य कार्यालय गुरुग्राम से की जाएगी। यदि कोई कैमरा काम नहीं कर रहा है तो उसके लिए सूचना देने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी मुख्य कार्यालय स्वत: जान जाएगा। किसी स्टेशन का कौन सा कैमरा काम नहीं कर रहा है। कंट्रोल रूम आरपीएफ थाना व चौकियों में बनाया जा रहा है।
विज्ञापन

परिषदीय स्कूलों के बच्चों के स्वेटर की खरीद इस वर्ष जेम पोर्टल के माध्यम से हुई। इससे सरकार को जनपद मात्र से 84 लाख की बचत हुई है। प्रति वर्ष स्कूलों में प्रति स्वेटर 200 रुपये दिए जाते थे। इसके बाद भी स्कूलों में स्वेटर खरीद में बड़े स्तर पर गड़बड़ी की शिकायतें मिल रही थी।
जनपद में 2045 परिषदीय स्कूलों में 2.25 लाख बच्चें अध्यनरत है। इन्हें सर्दी से बचाने के लिए स्वेटर का वितरण किया जाता है। योजना की शुरुआत वर्ष 2016-17 में की थी।
अभी तक योजना के स्कूलों को तहत प्रति बच्चा 200 रुपये स्वेटर खरीद के लिए दिए जाते थे। इसके बाद भी स्कूलों में स्वेटर खरीद में गड़बड़ी की शिकायतें शासन को मिल रही थी। शासन ने इस गड़बड़ी को रोकने के लिए इस वर्ष स्वेटर खरीद जेम पोर्टल के माध्यम से करने के आदेश जारी किए थे।
सर्व शिक्षा अभियान के जिला समन्वयक अरविंद अस्थाना ने बताया कि इस वर्ष जेम पोर्टल के माध्यम से प्रति स्वेटर 162.50 पैसें में की गई है। इसमें कुल 3.65 करोड़ खर्च हुआ।
इससे सीधे तौर पर सरकार को 84 लाख का फायदा हुआ है। जब कि पिछले यहीं स्वेटर स्कूलों में प्रति पीस 200 रूपये में खरीदे गए थे। इसमें 4.50 करोड़ खर्च हुए थे। कमोवेश यहीं स्थिति अन्य जनपदों में भी है।
इस संबंध में शिक्षक नेताओं का तर्क है कि स्कूलों में अधिकतम 200 स्वेटर की खरीद शिक्षक स्थानीय स्तर पर करते थे। इससे इनकी दरें महंगी रहती थी। इस वर्ष पूरे जनपद के ढाई लाख के करीब स्वेटर की खरीद एक साथ की गई है। इससे स्वेटर की कीमतों में गिरावट आई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें