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मोदी जी! उतार दीजिए 43 अरब रुपये कर्ज

Sun, 23 Oct 2016 11:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
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modi shimla
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बांदा। प्रधानमंत्री जी! बुंदेलखंड में आपके आगमन और आल्हा-ऊदल की वीर भूमि महोबा में आपके द्वारा दिए जाने वाले भाषण पर दैवी आपदा से त्रस्त किसानों की निगाहें टिकी हैं। वो टकटकी लगाए हैं कि मंच पर भाषण के दौरान आपके मुख से उनके लिए कुछ मरहम रूपी भाषण निकले। खासकर बुंदेलखंड के वे किसान काफी बेताब हैं जिन पर लगभग 43 अरब रुपये का सरकारी कर्ज है। इसकी अदायगी के कोई आसार नहीं हैं। ज्यादा मायूस और तनाव में आने वाले किसान हिम्मत हारकर आत्महत्याएं कर बैठे हैं और अभी भी कर रहे हैं। तमाम मौतें सदमे में हार्टअटैक से हो रही हैं। काश! प्रधानमंत्री किसानों के सिर पर रखा 43 अरब कर्ज का बोझ उतारकर जाएं। तब तो काफी हद तक बुंदेलखंड में किसानों के ‘अच्छे दिन’ आ सकते हैं।
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सोमवार (24 अक्तूबर) को प्रधानमंत्री के रूप में पहली बार बुंदेलखंड की ऐतिहासिक और आल्हा-ऊदल की वीर भूमि महोबा में आ रहे नरेंद्र मोदी को लेकर बुंदेली किसान कुछ ऐसा ही कह रहे हैं। कई सालों से कुदरत ने यहां के किसानों को बर्बाद कर दिया है। उन पर अरबों रुपये का कर्ज लद गया है। पांच वर्षों के दौरान कई सैकड़ा किसान खुदकुशी कर चुके हैं। उनकी मदद के नाम पर शोर और राजनीति ज्यादा हुई काम कम। केंद्र में पिछली कांग्रेस सरकार ने बुंदेलखंड पैकेज दिया। यह कागजी और आंकड़ों की बाजीगरी ज्यादा रही। कहीं भी किसान सरसब्ज नहीं हो पाया। मनरेगा यहां के पलायन को नहीं रोक पाई। आज भी बुंदेलखंड से लगभग 10 लाख मजदूर दिल्ली, मुंबई, सूरत आदि में पलायन कर गए हैं।

जिस धरती पर प्रधानमंत्री लगभग दो घंटे बिताएंगे और एक घंटे भाषण देंगे,  उसी चित्रकूटधाम मंडल में करीब 4 लाख 25 हजार किसानों पर 42 अरब 35 करोड़ 13 लाख रुपये का बैंक कर्ज है। सरकार ने इसकी माफी न की तो बैंक किसानों का घर-द्वार भी नीलाम कर सकते हैं। दिन-ब-दिन ब्याज की रकम सुरसा की तरह बढ़ रही है। सबसे ज्यादा कर्जदार बांदा के किसान हैं। उन पर 22 अरब एक करोड़ 50 लाख रुपये का कर्ज है। इनमें 14 अरब 70 करोड़ 75 लाख किसान क्रेडिट कार्ड का और 2 अरब 98 करोड़ 39 लाख अन्य कृषि ऋण है। इसके अलावा हमीरपुर के किसानों पर 74 करोड़ 26 लाख, महोबा के किसानों पर 1 करोड़ 33 लाख और चित्रकूट के किसानों पर 75 करोड़ 55 लाख रुपये का कर्ज है। यह सब एक मुश्त सरकार माफ कर दे तो यहां के किसानों के ‘अच्छे दिन’ आ सकते हैं।
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