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Banda News: मनरेगा श्रमिकों के हाथ खाली गांव में नहीं मिल रहा काम

Mon, 12 May 2025 01:02 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
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बांदा। श्रमिकों को रोजगार देने की सरकारी मनसा परवान नहीं चढ़ पा रही है। मनरेगा के कार्यों में सचिव रुचि नहीं ले रहे हैं। परिणाम स्वरूप अधिकतर ग्राम पंचायतों में मनरेगा के काम बंद हैं। मानव दिवस सृजित न होने से मजदूरों को काम नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में वह काम की तलाश में गांव छोडकर शहर भाग रहे है।
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जनपद में 470 ग्राम पंचायतों में 2.28 लाख पंजीकृत मनरेगा श्रमिक हैं, जिसमें करीब एक लाख सक्रिय श्रमिक हैं। यह गांव में मजदूरी का काम कर घर परिवार चला रहे हैं, लेकिन उन्हें गांव में काम ही नहीं मिल रहा है। करीब एक सैकड़ा ग्राम पंचायतों में प्रधान व सचिवों की लापरवाही से काम बंद है। कुछ ग्राम पंचायतों में आंशिक काम चल रहे हैं, जिससे श्रमिकों को नियमित काम नहीं मिल पा रहा है। कभी पत्नी घर बैठ जाती है तो कभी पति को ब्रेक कर दिया जाता है।
विभाग की मानें तो चालू वित्तीय वर्ष में ग्राम पंचायतों में महज 32 हजार 493 ही मानव दिवस सृजित किए गए हैं। यानि प्रतिदिन 500 मजदूरों को ही काम मिला। जबकि पिछले वर्ष मार्च और अप्रैल में एक लाख 22 हजार 567 मानव दिवस सृजित किए गए थे। पिछले साल की तुलना में इस साल 90 हजार 74 मानव दिवस कम सृजित किए गए। लोहरा के मनरेगा श्रमिक रामभवन का कहना है कि गांव में काम न मिलने से मुख्यालय जाना पड़ता है। सुबह छह बजे घर से निकलना पड़ता है। शाम को काम खत्म होने के बाद घर पहुंचते-पहुंचते रात के नौ बज जाते हैं। शिवनरेश का कहना है कि गांव में पति पत्नी दोनों काम कर लेते थे, लेकिन शहर पत्नी काम करने नहीं आती है। अकेले ही वह काम को आता है। ऐसे में घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है।
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