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विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि को एनजीटी की नोटिस

Tue, 31 Jan 2017 12:18 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, बांदा
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अवैध खनन - फोटो : प्रतीकात्मक फोटो
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नेशनल ग्रीन ट्र्रिब्यूनल (एनजीटी) ने अवैध बालू खनन के जरिए पर्यावरण को क्षति पहुंचाने के मामले में विधायक समेत जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि को दो सप्ताह के अंदर जवाब देने और निर्धारित तिथि पर ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश होने के आदेश दिए हैं। उधर, पूर्व में नोटिस के बावजूद उपस्थित न होने पर एक अन्य के विरुद्ध जमानती वारंट जारी किया गया।
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केन और बागै नदियों में अवैध खनन के खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में ब्रजमोहन यादव द्वारा दायर की गई याचिका पर ट्रिब्यूनल ने पिछले माह सात लोगों के विरुद्ध नोटिस जारी की थी। अवैध खनन को लेकर तत्कालीन पुलिस अधीक्षक द्वारा जिलाधिकारी को लिखे गए पत्र को आधार बनाकर कुछ और नाम इसमें शामिल कर दिए गए। ट्रिब्यूनल के जस्टिस स्वतंत्र कुमार व एक्सपर्ट मेंबर विक्रम सिंह की ओर से जारी की गई नोटिस में 13 अक्तूबर 2016 को तत्कालीन एसपी (बांदा) आरपी पांडेय द्वारा डीएम को लिखे पत्र को आधार बनाया है।

पत्र में कहा गया था कि गोपनीय रूप से जानकारी मिली है कि मध्य प्रदेश की कुरधना बालू खदान से पोकलैंड व जेसीबी मशीन से खनन किया जा रहा है। इससे नदी की जलधारा परिवर्तित होने के आसार हैं। ओवरलोड ट्रकों से जिले की सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं। याची ब्रजमोहन द्वारा यह पत्र एनजीटी के समक्ष पेश करने के बाद पारा (बिसंडा) निवासी लाखन सिंह व बांदा के दलजीत सिंह के विरुद्ध एनजीटी ने 27 जनवरी को जारी आदेश में प्रदेश सरकार को नोटिस तामील कराने और दो सप्ताह के अंदर दोनों से जवाब दाखिल करने को कहा है।
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उपस्थिति होने के लिए 7 मार्च तिथि नियत की गई है। नोटिस में कहा गया है कि पर्यावरण को क्षतिपूर्ति के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए? उधर, इसके पूर्व एनजीटी द्वारा सात लोगों को जारी की गई कारण बताओ नोटिस तामील होने के बावजूद नरैनी कोतवाली क्षेत्र के छनिहा पुरवा (प्रीतमपुरा) निवासी राजबहादुर यादव पुत्र तिरिया यादव ने हाजिर होकर जवाब नहीं दिया। इस पर ट्रिब्यूनल ने उसके विरुद्ध जमानती वारंट जारी करते हुए नरैनी कोतवाली प्रभारी के जरिए तामील कराने और 7 मार्च को ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश करने को कहा गया है।
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