बांदा। दक्षिण पूर्व बंगाल की खाड़ी पर बने चक्रवाती तूफान मोनथा का व्यापक असर बुंदेलखंड क्षेत्र में भी रहा। सोमवार को दिनभर धुंध छाई रही। रिमझिम बारिश ने सर्दी का अहसास कराया। यह 31 अक्टूबर तक प्रभावी रहेगा। बुंदेलखंड के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा व 30 व 31 को तेज हवा चलने की संभावना जताई जा रही है। बुंदेलखंड के मौसम विज्ञानियों ने किसानों को सलाह दी है कि अगर धान की फसल पक गई हो तो वह एक-दो दिन में सुरक्षित कर लें। छोटे दाने वाले रबी फसल की बोआई 31 अक्टूबर के बाद ही करें।
मौसम तंत्र के प्रभाव से बादलों की आवाजाही शुरू हो गई है। सोमवार को बांदा जिले में सुबह से ही आसमान घिरा रहा। धुंध के बीच दिनभर रिमझिम बारिश हुई। बुंदेलखंड में 29 से 31अक्तूबर के दौरान बिजली के साथ बारिश की संभावना है। बुंदेलखंड के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा व 30 व 31 अक्टूबर को तेज हवा चलने की संभावना जताई जा रही हैं।
कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विज्ञान विशेषज्ञ प्रो. दिनेश साह ने बताया कि इस मौसम में किसान खेत में खड़ी धान की फसल अगर पक गई हो तो उसकी कटाई कर लें। अन्यथा की दशा में हवा से फसल नुकसान का खतरा है। इसी तरह से छोटे दाने वाले रबी फसल की बोआई 31 अक्टूबर के बाद करें। पहले करने से बारिश होने पर भूमि की ऊपरी परत सख्त हो जाती है। जिससे अंकुरण प्रभावित हो सकता है। मौसम को ध्यान में रखते हुए कृषि कार्य करें।
मौसम के बदलाव से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें
पैलानी। किसान अमित द्विवेदी का कहना है कि उन्होंने छह बीघे में लाही और चने की फसलों की बोआई की है। बारिश हो जाएगी तो बीज के साथ-साथ खाद और बोआई में लगा रुपया भी मिट्टी में मिल जाएगा। किसान छोटकू प्रजापति ने बताया की ज्यादा बारिश से गेहूं की फसल के लिए तो यह पानी वरदान सिद्ध होगा परंतु अन्य फसलों के लिए ज्यादा पानी से बिजमारी होने की संभावनाएं है।
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खेत में खड़ी धान की फसल पानी और हवा के दबाव में खेतों में गिरी
अतर्रा। किसान सुरेश गौतम, राजेश द्विवेदी, ब्रह्मदत्त शुक्ला ,राजाभैया यादव ,रमेश कुशवाहा,सहित कई किसानों ने बताया कि फसलें कटाई के लिए तैयार थीं, तभी मौसम ने करवट ले ली। तेज हवा और बारिश के कारण खेतों में पानी भर गया है, जिससे कटाई में भी विलंब होगा और फसल सड़ने का खतरा बढ़ गया है।
चना-सरसों की फसल पर संकट के बादल
जसपुरा। किसान धनंजय सिंह ने बताया कि लगातार हुई बारिश के चलते खेतों में पानी भर गया है, जिससे रबी की फसलों की बोआई में पहले ही देरी हो चुकी है। अब दोबारा हुई बेमौसम बारिश ने बोई गई फसलों को भी नुकसान पहुंचाने का खतरा बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा, पहले तिल्ली की फसल बर्बाद हुई, अब अगर यही हाल रहा तो चना और सरसों भी खराब हो सकती है। मेहनत पर पानी फिरने जैसा लग रहा है।
फोटो- 05 सोमवार के दोपहर रिमझिम बारिश के बीच प्लेटफार्म नंबर दो पर पहुंचती प्रयागराज ग्वालियर ए
फोटो- 05 सोमवार के दोपहर रिमझिम बारिश के बीच प्लेटफार्म नंबर दो पर पहुंचती प्रयागराज ग्वालियर ए