अल्पसंख्यकों के लिए जहां प्रदेश सरकार आए दिन नई योजनाओं ला रही है, वहीं कर्मचारी इन योजनाओं पर पलीता लगाने में नहीं चूकते। इसमेें स्कूल, कॉलेज और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग आगे हैं।
नमूने के तौर पर देखें तो अल्पसंख्यक वर्ग की स्नातक छात्राओं द्वारा छात्रवृत्ति के लिए किए गए आवेदन ही गुम हो गए हैं। कॉलेज का कहना है कि अल्पसंख्यक कार्यालय को भेजे गए हैं, जबकि अल्पसंख्यक कार्यालय से पता चलता है वहां पहुंचे ही नहीं। परेशान छात्राओं ने मंगलवार को डीएम से गुहार लगाई।
मामला महिला डिग्री कालेज का है। यहीं की बीए द्वितीय वर्ष की अल्पसंख्यक छात्राओं ने मंगलवार को डीएम को ज्ञापन देकर बताया कि उन्होंने वर्ष 2014-15 की छात्रवृत्ति के लिए निर्धारित समय पर ऑनलाइन आवेदन किए थे। उसकी उनके पास प्रिंट कापी भी है, लेकिन अब तक उनके खाते में छात्रवृत्ति नहीं आई।
अल्पसंख्यक कार्यालय में बैठे बाबू दो टूक जवाब दे रहे हैं कि कालेज से फार्म नहीं मिले हैं। उधर, कालेज का बाबू का कहना है कि फार्म अल्पसंख्यक कार्यालय भेजे जा चुके हैं। छात्राएं दो दफ्तरों के बीच चकरघिन्नी बनी हैं। छात्रवृत्ति न मिलने से आर्थिक तंगी झेल रही हैं।
डीएम ने कार्रवाई का भरोसा दिलाया। छात्राओं में आफरीन हसन, अफसा नौशीन, कमरजहां, नूरजहां, गुलफशां परवीन, गुलनाज, फरहा नाज खान, सना बेबी, नाजरा खातून, निशा खातून, निगहत करीम, शबाना खातून, खुशबू, उम्मे रुमा आदि शामिल हैं।
बता दें कि ऑनलाइन आवेदन बिना पूर्व सूचना के ढाई माह पहले ही शुरू कर दिए गए थे, जबकि स्कूलों में सत्र जुलाई से शुरू हुआ। कागजों में इसे अप्रैल से दिखाया जा रहा है। आय, जाति, निवास प्रमाणपत्रों में अब ऑनलाइन व्यवस्था में 20 से 25 दिन लगते हैं।
पहले यह 4-5 दिन में हो जाती थी। छात्रवृत्ति की वेबसाइट का सर्वर आखिरी तीन दिनों में बेहद गड़बड़ रहा। क्षेत्र के राजकुमार गुप्ता ने मांग की है कि कक्षा 9 से 12 तक छात्रवृत्ति के लिए ऑनलाइन आवेदन की तिथि एक माह और बढ़ाई जाएं।
छात्रवृत्ति के ऑनलाइन फार्म भराए गए हैं। जिन छात्राओं ने सही फार्म भरे हैं उन्हें डाटाबेस में शामिल किया गया है। तमाम छात्राओं ने फार्म भरने में त्रुटियां कर दी हैं। उनके फार्म कॉलेज स्तर पर ही रोक लिए गए हैं। फिलहाल जिन छात्राओं को शिकायत है वह उनसे संपर्क कर सही स्थिति की जानकारी कर सकती हैं।
-आरडी यादव, जिला अल्पसंख्यक अधिकारी, बांदा