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दुग्ध समितियों का कर्वी में फिर होगा विलय

Thu, 22 Oct 2015 11:41 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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बांदा। कई साल से घाटे में चल रहीं बांदा और हमीरपुर की सहकारी दुग्ध समितियों का विलय फिर कर्वी (चित्रकूट) दुग्ध संघ में हो जाएगा। दुग्ध संघ आयुक्त ने यह कार्रवाई पूरी करने के लिए 65 दिन का समय दिया है। शासन की मंशा है कि मंडल में सिर्फ एक दुग्ध संघ से ही उपयोगिता और व्यवसाय बढ़ाकर आर्थिक स्थिति सुदृढ़ की जाए।
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जिले में 204 दुग्ध समितियों में सिर्फ 30 संचालित हैं। इनके जरिये प्रतिदिन एक हजार लीटर दूध आ रहा है। उसे शहर की ही एक डेयरी में बेंचा जा रहा है।

बांदा और हमीरपुर जिले की दुग्ध संघ समितियां आठ साल पहले तक कर्वी दुग्ध संघ से जुड़ी थीं। इनका विस्तार करने के लिए वर्ष 2007 में दोनों जिलों में दुग्ध संघ की स्थापना हुई। शासन ने करीब दो-दो करोड़ रुपये खर्च कर चिलिंग प्लांट स्थापित किए। जिले में 204 समितियां खोली गईं।

इनमें हर रोज 35 हजार लीटर तक दूध इकट्ठा होने लगा, किंतु सरकार की उपेक्षा के चलते दुग्ध संघ की स्थिति बदहाल हो गई। लापरवाही का आलम यह है कि सात साल में दुग्ध संघ प्लांट में बिजली का कनेक्शन तक नहीं हो पाया। इसके लिए चार लाख रुपये की जरूरत है, जो शासन से अब तक नहीं मिले। ऐसे में यहां का चिलिंग प्लांट कई साल से बंद है।
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पूर्व जिलाधिकारी जीएस नवीन कुमार ने 20 करोड़ की लागत से प्रोसेसिंग प्लांट लगाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था, जिसे आज तक मंजूरी नहीं मिली। जिला योजना से भी इसको धेला नहीं मिला। दुग्ध संघ का करीब 25 लाख रुपये तीन साल से कानपुर की पराग दुग्ध डेयरी में बकाया है।

इस समय 204 दुग्ध समितियों में 174 डेड पड़ी हैं। 30 सहकारी समितियां नरैनी क्षेत्र में संचालित हैं। इनसे एक हजार लीटर दुग्ध की आवक हो रही है। यह दूध शहर की अतर्रा चुंगी स्थित एक डेयरी में 31 रुपये लीटर की दर से बेचा जा रहा है, जबकि इसकी खरीद 29 रुपये लीटर हो रही है।

दुग्ध संघ में तैनात जीएम व दुग्ध संघ अधिकारी सहित आठ सुपरवाइजरों को बिना काम के वेतन मिल रहा है। इनमें पांच राजकीय और तीन दुग्ध संघ से नियुक्त हैं। दुग्ध सहकारी समिति आयुक्त अर्चना अग्रवाल ने 14 अक्तूबर  को आदेश जारी कर हमीरपुर व बांदा के दुग्ध संघ को कर्वी (चित्रकूट) में विलय करने को कहा है।

उनका कहना है कि प्रदेश में घाटे में चल रहे 58 दुग्ध संघों को 12 दुग्ध संघों में विलय कर लाभ पर पहुंचाया जाएगा। प्रत्येक मंडल में एक दुग्ध संघ होगा। विलय की कार्रवाई पूरी करने के लिए 65 दिन का समय दिया गया है।

शासनादेश पर अमल किया जा रहा है। जल्द ही दोनों जिलों की सहकारी दुग्ध समितियों का संचालन कर्वी (चित्रकूट) से शुरू होगा। पांच नवंबर को सभी दुग्ध समितियों की बैठक बुलाई गई है। समितियों से स्थानांतरण संबंधी आपत्तियां मांगी गई हैं।  -पीके श्रीवास्तव, जनरल मैनेजर, सहकारी दुग्ध संघ, बांदा।
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