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मनरेगा के 202 रुपये नहीं दिहाड़ी के 350 रुपये चाहिए

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शहर महेश्वरी देवी रामलीला रोड में काम की तलाश में मजदूरों की भीड़। - फोटो : BANDA
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बांदा। अनलॉक-1 में अब राजमिस्त्री, रेजा और बेलदार काम ढूंढने निकल पड़े हैं। रोज की तरह मंगलवार को भी रामलीला रोड और इंदिरा नगर में राजमिस्त्री, रेजा और बेलदारों का जमावड़ा लग रहा है। दिहाड़ी में काम करने वाले इन मजदूरों को गांव में ही मनरेगा से रोजगार देने की योजना शायद रास नहीं आ रही। इसी का नतीजा है कि गांव में मनरेगा का काम ठुकराकर शहर में मजदूरी तलाश रहे हैं। इससे जिला प्रशासन की कवायदों को झटका लग रहा है। यहां उमड़ रही मजदूरों की भीड़ देखकर तो यही लग रहा है कि इन्हें मनरेगा के 202 रुपये नहीं बल्कि दिहाड़ी के 350 रुपये चाहिए।
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रामलीला मैदान में अनलॉक-1 के चलते दिहाड़ी कामगारों की भीड़ उमड़ रही है। इनमें राजमिस्त्री, बेलदार और रेजा शामिल हैं। राजमिस्त्री के एक दिन की मजदूरी 500 से 600 रुपये निर्धारित है। बेलदार की 350 से 400 रुपये और रेजा की 350 रुपये निर्धारित है। जिले के समीपवर्ती गांव जमुनीपुरवा से आए रेजा का काम करने वाले मजदूर रामनरेश ने बताया कि गांव में मनरेगा से काम देने की योजना है, पर उसमें 202 मिलते हैं, वह भी तमाम कवायद पूरी करने के बाद, पहले जॉब कार्ड बनवाओ, उसके बाद नगद भुगतान भी नहीं होता है, यहां घर की जरूरत रोज की है। रोज कमाकर नहीं ले जाओ तो शाम का चूल्हा भी नहीं जले।
इसी तरह पचनेही गांव के रहने वाले रामसनेही ने बताया कि वह राजमिस्त्री का काम करते हैं। गांव में राजमिस्त्री का काम ठेके में पहले से लगे राजमिस्त्री को ही मिल पाता है, ऐसे में शहर आकर काम ढूंढना उनकी मजबूरी है।
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इस संबंध में उपायुक्त मनरेगा जयप्रकाश मौर्या ने बताया कि मनरेगा की मजदूरी कम है, और भुगतान की प्रक्रिया ऑनलाइन है। ऐेसे में नगद और अधिक भुगतान के लिए ज्यादातर मजदूर प्राइवेट में अपना काम करना पसंद कर रहें हैं। जो भी मजदूर काम मांगता है, उसे मनरेगा के तहत काम दिया जा रहा है। जिले में 22 हजार प्रवासी मजदूरों को नया जॉब कार्ड बनाकर काम दिया जा रहा है।
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