बर्फीली हवाओं और भीषण ठंड से अभी निजात मिलने के
आसार नजर नहीं आ रहे। लगातार पांचवें दिन ठंड में जनजीवन ठिठुरा रहा।
दिन-ब-दिन पारे आ रही गिरावट के चलते सोमवार इस सीजन का सबसे ठंडा दिन रहा।
अधिकतम व न्यूनतम पारा दो-दो डिग्री और नीचे आ गया।
यह अधिकतम 14 व
न्यूनतम 6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुबह से भीषण कोहरा रहा। बच्चों
को ठिठुरते हुए स्कूल जाना पड़ा। उधर, प्रशासन द्वारा अभी तक स्कूलों में
शीत अवकाश नहीं घोषित किया गया।
केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के
मुताबिक पिछले वर्ष 22 दिसंबर को अधिकतम तापमान 16 और न्यूनतम 7 डिग्री
सेल्सियस था। इससे पहले वर्ष 2012 में अधिकतम 15 और न्यूनतम 8 डिग्री
तापमान रहा।
इस वर्ष पहाड़ों में ज्यादा बर्फबारी की वजह से
बर्फीली पछुआ हवा के झोंके ठंड में इजाफा कर रहे हैं। सोमवार को सुबह घने
कोहरे और कड़ाके की ठंड की वजह से लोग घरों में दुबके रहे। सरकारी स्कूलों
में बच्चों की संख्या काफी कम रही। जबकि पब्लिक स्कूलों में नौनिहालों को
ठिठुरते हुए जाना पड़ा।
डीएम के आदेश के बाद भी शहर में रैनबसेरों
के सालों से बंद पट नहीं खुले। संकटमोचन के सामने नगर पालिका के रैनबसेरा
में ताला पड़ा है। बाहर बरामदे में गंदगी की भरमार है।
रोडवेज बस
स्टैंड के रैनबसेरा का भी कोई पुरसाहाल नहीं है। यात्रियों को ठंड भरी रात
काटने के लिए भटकना पड़ रहा है। जिला अस्पताल के रैन बसेरा में कैंटीन चल
रही है। यहां अलाव के भी इंतजाम नहीं होने से मरीजों और तीमारदारों की जान
पर बनी हुई है।
माध्यमिक शिक्षक संघ और प्राथमिक शिक्षक संघ ने
डीएम को ज्ञापन देकर ठंड के मद्देनजर विद्यालयों में अवकाश घोषित करने की
मांग की है।
माध्यमिक शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष आलोक सिंह चंदेल और
प्राथमिक शिक्षक संघ बड़ोखर ब्लाक अध्यक्ष देवेश स्वरूप निगम ने कहा है कि
भीषण ठंड से बच्चों को खतरा है।
कोहरे की वजह से हादसे हो रहे हैं।
गरीब छात्र-छात्राओं के पास गर्म कपड़े नहीं हैं। मानवीय आधार पर प्राथमिक
व माध्यमिक स्कूलों में अवकाश घोषित किया जाए।
माध्यमिक शिक्षक
संघ मंत्री आर चंद्रा और प्राथमिक शिक्षक संघ के रामकिशोर साहू, रामलाल
कश्यप, अनिल कुशवाहा, ओम प्रकाश श्रीवास, आशा द्विवेदी, गीता पाल, रमा
श्रीवास्तव आदि ने भी यही मांग की।