बांदा। स्वच्छ भारत (ग्रामीण) के कर्मचारियों ने मानदेय वृद्धि की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। अपर मुख्य सचिव को संबोधित ज्ञापन डीपीआरओ को सौंपा। बताया कि जिला व विकास खंड स्तर पर कार्यरत कंसलटेंट सहित अन्य कर्मचारी मिशन को सफल बनाने में लगे हैं। कोरोना काल में भी जान की परवाह किए बिना काम कर रहे हैं। मानदेय कम होने से सभी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
छह फरवरी 2015 को शासन ने निर्देश दिए थे कि मानदेय व यात्रा भत्ता का निर्धारण राज्य आजीविका मिशन के मानदेय के आधार पर किया जा सकता है। जिसका निर्णय कार्यकारी समिति, स्टेट सैनिटेशन मिशन द्वारा किया जाएगा। कार्यकारी समिति, स्टेट सैनिटेशन मिशन द्वारा स्वच्छ भारत ग्रामीण के अंतर्गत राज्य स्तर पर कार्यरत कंसलटेंट के मानदेय में प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत बढ़ोतरी की जाती है, जबकि स्टेट व जिले के लिए एक ही गाइडलाइन है।
इसके बावजूद मानदेय में विरोधाभास है। पंचायतराज विभाग में डीपीएम/एडीपीएम मानदेय में प्रतिवर्ष बढ़ोतरी की जाती है। सर्विस चार्ज/सर्विस टैक्स का भुगतान विभाग द्वारा किया जाता है। 2013 में नियुक्त डीपीएम को 4500 व 2006 में नियुक्त जिला कंसलटेंट को 35 हजार रुपये दिए जा रहे हैं।
खंड प्रेरक, कंप्यूटर आपरेटर सहित योजना सहायक के मानदेय में वृद्धि नियुक्ति तिथि के बाद से नहीं की गई। मानदेय में प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाए। जिला कंसलटेंट मनोज कुमार, नागेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे। सुभाष चंद्र, जगरूप सिंह, भागीरथ प्रसाद आदि मौजूद रहे। (संवाद)