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प्रकृति व जीवों के साथ संतुलन से ही सार्थक जीवन

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Meaningful life out of balance with nature and living beings - फोटो : BANDA
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अतर्रा। प्रकृति एवं जीवों के साथ संतुलन करके ही सार्थक जीवन जिया जा सकता है। साथ ही किसानों को उन्नतिशील बीज और सिंचाई में ड्रिप को अपनाना और बढ़ाना चाहिए। यह बात उत्तर प्रदेश किसान समृद्धि आयोग सदस्य प्रेम सिंह ने सोमवार को यहां पीजी कॉलेज में आयोजित कृषि विभाग की रबी गोष्ठी में कही। उन्होंने आजीविका के साथ आय आधारित खेती के टिप्स भी दिए।
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गोष्ठी का विषय- किसान, वैज्ञानिक, छात्र अंतरक्रिया एवं परिचर्चा था। श्री सिंह सहित समाजसेवी उमाशंकर पांडेय व कॉलेज प्रबंधक कर्ण सिंह, प्राचार्य डॉ. एसी मिश्रा ने दीप प्रज्ज्वलित कर गोष्ठी का उद्घाटन किया।
कृषि संकाय द्वारा संपादित पत्रिका प्रथम मौसम आधारित कृषि सलाह बुलेटिन का विमोचन किया। गोष्ठी का संचालन कर रहे डॉ. मोहम्मद हलीम खां ने रबी फसलों में मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन महत्व की जानकारी दी। उमाशंकर पांडेय ने जल संरक्षण के लिए ड्रिप सिंचाई के लिए प्रेरित किया। कृषि फार्म अधीक्षक लेखराज निरंजन ने उन्नतिशील बीज और जैविक खाद का उपयोग करने की सलाह दी।
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प्रगतिशील किसान जाहिद अली ने आधुनिक विधि से सब्जियों व धान की खेती पर चर्चा की। कृषि संकाय विभागाध्यक्ष डॉ. केपी कुशवाहा, डॉ. संजय श्रीवास्तव, डॉ. विवेक चतुर्वेदी, डॉ. सीएल कुशवाहा, डॉ.नवल किशोर गुप्ता, डॉ.सियाराम आदि ने भी संबोधित किया।
बीएससी कृषि फाइनल के छात्र-छात्राओं ने प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए। प्रबंध कार्यकारिणी सदस्य राजेंद्र सिंह सेंगर, रमेशचंद्र गौतम, आलोक तिवारी, देवेश कुमार, मिथिलेश कुमार, धीरेंद्र सिंह, रणजीत सिंह, रविभूषण बाजपेयी आदि मौजूद रहे।
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