बांदा। मेडिकल कालेज से एमसीआई (मेडिकल कौंसिल आफ इंडिया) टीम के जाते ही रातोरात बुलाए गए डाक्टरों की फौज भी नदारद हो गई। मरीजों की संख्या भी घटकर आधी हो गई। कालेज फिर पुराने ढर्रे पर आ गया। मंगलवार को टीम के निरीक्षण के दौरान ड्यूटी पर मुस्तैद 114 डाक्टरों मेें अगले ही दिन बुधवार को सिर्फ 55 डाक्टर नजर आए। शेष सभी जहां से आए थे, वहां लौट गए।
मेडिकल कालेज को एमसीआई की मान्यता के लिए प्रदेश सरकार का स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल कालेज प्रशासन दोनों ही प्रयासरत हैं। तीन माह पूर्व एमसीआई टीम निरीक्षण करने आई थी। तब काफी खामियां थीं। टीम ने उन्हें पूरा करने की शर्त रखी थी। सोमवार (4 अप्रैल) को दिल्ली से एमसीआई टीम फिर मेडिकल कालेज आई।
दो दिनों तक सघन निरीक्षण किया। टीम को संतुष्ट करने के लिए मेडिकल कालेज प्रशासन ने तमाम दिखावटी व्यवस्थाएं भी कर ली थी। 50 से अधिक महिला-पुरुष डाक्टर बाहरी जनपदों से बुला लिए गए थे। मरीजों की भीड़ भी खूब जुटा ली गई थी। वार्ड के सभी 300 बेड लगभग मरीजों से भरे थे। भर्ती मरीजों को दो दिन रोकने के लिए मेडिकल कालेज वालोें ने उन्हें लंच पैकेट भी मुहैया कराए।
टीम के सामने सब कुछ चौकस दिखाया, फिर भी टीम ने कई खामियां पकड़ीं। निरीक्षण के दौरान मौजूद प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक डॉ. वीएन त्रिपाठी और कालेज प्राचार्य डॉ. सुनील कुमार आर्य ने इन कमियों को शीघ्र दूर करने का भरोसा दिलाकर टीम से मान्यता की संस्तुति देने की चिरौरी की थी, लेकिन टीम के जाते ही सब कुछ बदल गया।
डॉक्टर नदारद हुए तो मरीज भी गायब हो गए। इमरजेंसी कक्ष के डाक्टर तक की कुर्सी खाली रही। जूनियर डाक्टर मरीजों को देखते रहे। उधर, अभी भी कई विभागों में कमियां हैं। हृदय रोग विभाग में ईसीजी मशीन नहीं है। बर्न वार्ड में ताला पड़ा है। हालांकि प्राचार्य का कहना है कि सब कुछ जल्द ही दुरुस्त हो जाएगा।
इलाज में लापरवाही का आरोप लगा किया हंगामा
बांदा। साल भर पहले शुरू हुए मेडिकल कालेज में बुधवार को पहली ‘अशुभ’ खबर आई। यहां एक मरीज की इलाज के दौरान मौत हो गई। मेडिकल कालेज के इतिहास मेें यह पहली मौत है। मृतक के परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगा हंगामा किया। डाक्टरों के काफी देर तक समझाने पर मान गए। इसके बाद परिजन शव लेकर चले गए।
नरैनी का काशी प्रसाद (60) मंगलवार को दोपहर मेडिकल कालेज लाया गया था। उसके लीवर और पेट में गड़बड़ी थी। डाक्टरों के मुताबिक उसकी हालत गंभीर थी। इलाज के दौरान बुधवार को सुबह काशी प्रसाद चल बसा। इस पर परिजन भड़क गए। आरोप लगाया कि इलाज में लापरवाही की गई है।
डाक्टरों से नोकझोंक हुई। अन्य मरीज और तीमारदार भी जमा हो गए। परिजनों ने धमकी दी कि वे दोषियों पर कार्रवाई हुए बगैर शव नहीं उठाएंगे। देर तक हंगामे के बाद डाक्टरों और अन्य लोगों ने परिजनों को समझा-बुझाकर शांत किया।
मेडिकल कालेज में हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. जीके अग्रवाल ने बताया कि मरीज का लीवर खराब था। पेट में पानी था। उसका इलाज कानपुर में चल रहा था। यहां जब लाया गया तो हालत गंभीर थी। उसे यहां से रेफर भी कर दिया गया, लेकिन परिजन नहीं ले गए। डॉ. अग्रवाल ने बताया कि पेट से पानी निकालकर इलाज किया जा रहा था तभी उसकी मौत हो गई।