महुआ गांव में जमा और निकासी के लिए बैंक की लाइन में लगी किसानों के घरों की महिलाएं।
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बबेरू/नरैनी/बेंदा। पांच सौ और हजार रुपये की नोटों की बंदी ने किसानों की खेती का गणित बिगाड़ दिया है। खेत-खलिहान छोड़कर किसान पूरा-पूरा दिन बैंकों की लाइनों में बिता रहे हैं। उसके बाद भी उन्हें कुछ हाथ नहीं लग रहा। किसी को पलेवा के पानी की उधारी देना है तो किसी को खाद-बीज लेना है। कोई बीमार है तो किसी के पास परीक्षा में जाने के लिए किराया नहीं है। संकट ऐसा है कि गांवों में उधारी भी नहीं मिल रही।
देवरथा गांव के किसान छेदीलाल और परसौली के बुद्धविलास मिश्रा ने बताया कि कई दिनों से पूरा दिन बैंक में बिता रहे हैं, लेकिन जमा पैसा नहीं मिल पा रहा। खेत के लिए खाद नहीं खरीद पा रहे। सातर गांव के किसान और पूर्व बीडीसी राम प्रताप वर्मा, पून गांव के जयकिशोर मिश्रा, पतवन के वीरेंद्र सिंह यादव इत्यादि भी कमोवेश यही समस्या है। सुखराम वर्मा (भैरमपुरवा) तिंदवारी स्थित इलाहाबाद बैंक से तीसरे दिन भी खाली हाथ लौट गया।
घर का राशन खत्म हो चुका है। खगइया ताला की सुधा देवी ने कहा कि घर में धेला नहीं है। न सब्जी आ पा रही है न बच्चों की फीस। दतरौली की फूलकली ने खेतों में पलेवा के लिए पानी लिया था। ट्यूबवेल मालिक को सिंचाई का पैसा देना है। पर बैंक से रोज बैरंग लौट रही है। जरिया गांव की रजनी देवी अपने बीमार ससुर दुर्गा को लेकर आई थी। बिना पैसे उसे अस्पताल से लौटा दिया गया। अब बैंक से भी लौटना पड़ा।
नरैनी में खरौंच गांव के सूर्य प्रकाश मिश्रा को बीज के लिए पैसे की जरूरत है। बताया कि रोजाना बैंक के चक्कर लगा रहा है। फिलहाल जमा हो रहा है निकासी नहीं हो रही। पांड़ादेव रिसौरा के नत्थू ने अपने पूंजी जमा कर दी लेकिन बीज के लिए पैसा नहीं मिल रहा। छतैनी गांव के सुमेरा को पलेवा के लिए पैसे की दरकार है।