बांदा। पांच सौ और हजार के पुराने नोटों की जमा और छोटे नोटों की निकासी के लिए शनिवार को भी बैंकों में मारामारी रही। बैंकों का खजाना लगातार भर रहा है। निकासी की रफ्तार बेहद सुस्त है। शनिवार को शहर के ही चुनिंदा बैंकों में तकरीबन 30 करोड़ रुपये जमा किए गए।
तीन दिन में लगभग 80 करोड़ रुपये से ज्यादा जमा हो चुके हैं। निकासी लगभग तीन करोड़ रुपये की हुई है। सबसे ज्यादा लेन-देन स्टेट बैंक की मुख्य ब्रांच से हो रहा है। उधर, एटीएम चलाने की घोषणा चौथे दिन भी फ्लाप रही। इक्का-दुक्का को छोड़कर अधिकांश एटीएम में ताले जड़े रहे।
बैंकों में भीड़ कम नहीं हो रही। भीड़ में दिन-ब-दिन इजाफा हो रहा है। जमा और निकासी की रकम भी बढ़ती जा रही है। अव्यवस्थाएं जस की तस हैं। भीड़ बढ़ने के बाद भी बैंकों में कोई अतिरिक्त व्यवस्थाएं नहीं हो रहीं। स्टाफ का रोना रोया जा रहा है।
शनिवार को दिन भी बैंकों में जमकर बंद नोटों का खजाना बरसा। स्टेट बैंक की बांदा सिटी शाखा में 2.50 करोड़ जमा हुए और 25 लाख के नोट बदले गए। प्रबंधक विद्याशंकर शर्मा ने बताया कि इसके पूर्व शुक्रवार को 2 करोड़ जमा हुए थे और 20 लाख बदले गए थे। दो लाख रुपये के सिक्के (10 रुपये) भी बांटे गए।
उधर, बैंक आफ बड़ौदा में शनिवार को तीन करोड़ जमा किए गए। अब तक यहां तीन दिनों में 11 करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं। 35 लाख रुपये की निकासी हुई है। नरैनी प्रतिनिधि के मुताबिक इलाहाबाद बैंक में 6 करोड़ जमा हुए और 25 लाख रुपये निकाले गए।
बिजली विभाग ने 55 लाख और वसूले
बांदा। पावर कारपोरेशन द्वारा बिजली बिलों की अदायगी में प्रतिबंधित नोट जमा करने की छूट 14 नवंबर तक बढ़ा दिए जाने के बाद बकाएदार उपभोक्ता लगातार अदायगी कर रहे हैं। शनिवार को 55 लाख रुपये और जमा हुए।
इसके पहले दो दिनों में लगभग दो करोड़ जमा हो चुके हैं। सब स्टेशनों में अतिरिक्त काउंटरों पर बिल जमा किए जा रहे हैं। ठेकेदार सचिन मिश्रा सहित अन्य ठेकेदारों के नेतृत्व में टीमें घर-घर जाकर बकाएदारी वसूल रही हैं। अदायगी न करने पर कनेक्शन काटे जा रहे हैं। शनिवार को 38 कनेक्शन काटे गए।
खाद-बीज में भी मिले 15 दिन की छूट
बांदा। प्रगतिशील किसान लाल खां (छनेहरा) ने मांग की है कि अस्पताल, बिजली विभाग आदि की तरह खाद-बीज की खरीद में भी किसानों को प्रतिबंधित नोट इस्तेमाल करने की छूट 15 दिन तक दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में बुआई और पलेवा हो रहा है। किसानों को खाद आदि के लिए पैसे की सख्त जरूरत है। बैंकों में उन्हें पैसा नहीं मिल रहा। ऐसे में अवधि बढ़ा दिए जाने से किसानों को काफी राहत मिलेगी।