बांदा। मोहर्रम में शिया मुस्लिम इमाम बारगाहों मजलिसों का सिलसिला चल रहा है। रविवार को पांचवीं मोहर्रम पर अलग-अलग बारगाहों में कई मजलिसें हुईं।
गाजीपुर से आए मौलाना सैयद हैदर करबलाई ने इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत को हक और इंसानियत के लिए बताया। अंजुमन अब्बासिया के शमसुल हसन रिजवी ने नौहा पढ़ा।
अनवरी बेगम कंपाउंड अलीगंज की मजलिस में झांसी से आए मौलाना सैयद फरमान अली आब्दी ने कहा कि इमाम हुसैन ने हक के रास्ते पर चलते हुए जान कुर्बान कर दी लेकिन जालिम के आगे सर नहीं झुकाया।
क्योटरा रेलवे क्रॉसिंग स्थित मरहूम मिर्जा बाकर साहब के यहां मजलिस में फैजान आलम, औन अब्बास, अदीब अब्बास रिजवी, शमसुल हसन रिजवी ने मरसियाख्वानी की।
आब्दी साहब ,मिर्जा यावर हुसैन, अली अकबर, आगा अंसार, मजहर हुसैन , मोहम्मद रजा, शोएब रिजवी, जफर रजा, शजरुल हसन, असगर रजा, अली हैदर, हुसैन अहमद रजा, हैदर शिकोह , हसन रजा आदि शरीक रहे।