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मंडल में प्रशासक खर्च कर गए 55 करोड़

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बांदा। चित्रकूटधाम मंडल की गांव की नई सरकारों को ग्राम पंचायत का खजाना खाली मिला है। इन्हें फिलहाल सरकार से मिलने वाले बजट का इंतजार करना होगा। बुंदेलखंड में पद मुक्त हुईं ग्राम पंचायतों द्वारा छोड़े गए करीब 55 करोड़ रुपये प्रशासकों ने ठिकाने लगा दिए। 25 दिसंबर को कार्यकाल खत्म होने के बाद शासन ने यह प्रशासक नियुक्त किए थे।
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27 मई को पहली बैठक के साथ नवनिर्वाचित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल शुरू हो चुका है। नए प्रधान गांवों में विकास कार्य की शुरुआत के लिए बेताब हैं, लेकिन बजट आड़े आ रहा है। ग्राम पंचायतों के खातों में पैसा नहीं है। बांदा में करीब 25 करोड़, महोबा में 13.80 करोड़, हमीरपुर 6 करोड़ और उरई (जालौन) में 10 करोड़ रुपये पिछली पंचायतों ने अपने खातों में छोड़े थे, लेकिन कुछ दिन के लिए नियुक्त हुए प्रशासकों ने आनन-फानन इन्हें ठिकाने लगा दिया। बांदा में खजाना खाली होने से ग्राम समितियों के खातों में फूटी कौड़ी नहीं है। कोरोना महामारी से निपटने और गांव के विकास के लिए छोटी सरकार बजट के लिए बड़ी सरकार से आस लगाए है। हालांकि, कोरोना काल में अधिकतर काम ठप रहे।
वित्तीय वर्ष 2019-20 में शासन की ओर से बांदा जिले की 469 ग्राम पंचायतों को 14वें व 15वें वित्त से 88 करोड़ का बजट दिया गया था। इस बजट में 63 करोड़ रुपये ग्राम प्रधानों ने अपने कार्यकाल के दौरान गांव के विकास कार्यों में खर्च कर डाले। ग्राम पंचायतें भंग होने के बाद 25 दिसंबर से 26 मई तक कार्यभार संभाले प्रशासकों ने शेष 25 करोड़ रुपये खर्च कर डाले। अब संगठित 373 ग्राम पंचायतों के खातों में एक रुपया भी नहीं बचा। प्रधानों के सामने गांव के विकास और कोविड महामारी से निपटने की चुनौती है। नव निर्वाचित प्रधान बजट के लिए शासन का मुंह निहार रहे हैं। उधर, ग्राम प्रधानों का आरोप है कि शपथ व ग्राम पंचायत की पहली बैठक हो जाने के बाद भी जिला पंचायत राज विभाग उनके खाते नहीं खोल रहा है। सचिव ग्राम समिति के खाते का लेखा-जोखा नहीं दे रहे हैं।
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पहली बैठक हुई, मगर खाता नहीं खुला
तिंदवारी ब्लाक के पिपरगवां ग्राम पंचायत ग्राम प्रधान आशा देवी का कहना है कि पहली बैठक हो जाने के बाद भी जिला पंचायत राज विभाग खाता नहीं खोल रहा है। समिति के खाते की सचिव कोई जानकारी नहीं दे रहे हैं। कोरोना महामारी से निपटने के लिए उनके हाथ खाली हैं। ग्रामीणों के सहयोग से सैनिटाइजेशन और सफाई करा रही हैं।
ग्राम समिति के पैसों का कोई लेखा-जोख नहीं
नरैनी ब्लाक के ग्राम पंचायत महोतरा प्रधान विमला अवस्थी का कहना है कि कोविड महामारी समेत गांव के विकास की कई चुनौतियां हैं। पहली बैठक हुए तीन दिन हुए, लेकिन अभी तक ग्राम समिति का संयुक्त खाता नहीं खुला। ग्राम समिति के पैसों का कोई लेखा-जोखा नहीं दिया जा रहा। कहा जाता है कि ग्राम समिति में एक भी पैसा नहीं बचा है।
खाता न खुलने से वित्तीय अधिकार नहीं
नरैनी ब्लाक के ग्राम पंचायत गुढ़ा कलां की प्रधान संतोष कुमार का कहना है कि गांव का विकास पहली प्राथमिकता है। ढेरों समस्याएं हैं। ग्राम समिति का खाता न खुलने से वित्तीय अधिकार नहीं हैं। वह एक रुपये भी नहीं खर्च कर सकते। यह भी नहीं पता कि खाते में बजट है या नहीं। सचिव ग्राम समिति के बजट की कोई जानकारी नहीं दे रहे।
महुआ विकास खंड के ग्राम पंचायत बड़ेहा स्योढ़ा के प्रधान प्रदीप द्विवेदी का कहना है कि 1600 की आबादी वाले इस गांव में कोरोना समेत अधूरे विकास कार्य पूरे कराने की चुनौती है, लेकिन न तो वित्तीय अधिकार है और न ही पैसा। ग्राम समिति में खाता भी नहीं खुला। सचिव खाते के बारे में नहीं बता रहे। महज सफाई ही कराई जा रही है।
ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 25 दिसंबर को समाप्त हो गया था, लेकिन गांवों में ग्राम सचिवालय, सामुदायिक शौचालय कई कार्य अधूरे पड़े थे। प्रशासकों ने वर्ष 2019-20 के बचे बजट से इन कार्यों पूरा कराया है। वर्ष 2021-22 का बजट अभी नहीं आया है।
- रमेशचंद्र गुप्ता, अपर जिला पंचायत राज अधिकारी, बांदा
प्रशासकों ने खर्च किए 13.80 करोड़ रुपये
महोबा। ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 25 दिसंबर 2020 को समाप्त होने के बाद प्रशासकों को जिम्मेदारी दी गई थी। प्रशासकों ने 4 जनवरी से 24 मई 2021 तक ग्राम पंचायतों के खातों में शेष रकम को तेजी से खर्च किया। जिले में कुल 273 ग्राम पंचायते हैं। जिला पंचायत राज अधिकारी संतोष कुमार ने बताया कि ग्राम पंचायतों में तैनात प्रशासक विकास कार्यों और कोविड से बचाव को लेकर 13.80 करोड़ खर्च कर चुके हैं। जिसमें चरखारी ब्लॉक की 52 ग्राम पंचायतों में 15970361 , जैतपुर ब्लाक की 63 ग्राम पंचायतों में 40,27,400, कबरई ब्लॉक की 94 ग्राम पंचायतों में 49912987 व पनवाड़ी ब्लॉक की 64 ग्राम पंचायतों में 3,18,87711 रूपये खर्च किए गए हैं। (संवाद)
हमीरपुर में करीब छह करोड़ से कराए कार्य
हमीरपुर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले प्रधानों का कार्यकाल 25 फरवरी को समाप्त हो गया था। कार्यकाल समाप्त होने पर प्रधानों के बस्ते जमा करा लिए गए थे। उसके बाद से ग्राम पंचायतों के विकास कार्य के लिए प्रशासक नियुक्त किए गए। 26 अप्रैल को हुए त्रिस्तरीय चुनाव के बाद 330 ग्राम पंचायतों में चुनाव हुए। जिसमें 25 व 26 मई को 213 नवनिर्वाचित प्रधानों ने शपथ ली है। वहीं 117 ग्राम पंचायतों में कोरम पूरा न होने के चलते उन ग्राम पंचायतों की कमान प्रशासक ही संभाले हैं। डीपीआरओ राजेंद्र प्रकाश ने बताया कि बिना प्रधानों के रहते प्रशासकों ने करीब 6 करोड़ से विकास कार्य कराए हैं। कहा कि ग्राम पंचायतों में विकास कार्यो के लिए काफी बजट पड़ा है। (संवाद)
मनेरगा के अलावा नहीं शुुरू हुए काम
चित्रकूट। जिले के पांच ब्लाकों में 331 नई ग्राम पंचायत का गठन होने के बाद हर ब्लाकवार सरकारी बजट की उपलब्धता को लेकर नए प्रधानों ने कार्य योजना बनानी शुरू कर दी है। हालांकि, जिले के सभी ब्लाकों में इस चालू वित्तीय वर्ष में कोई खास बजट नहीं मिल पाया था। चित्रकूट सदर ब्लाक के 92 गांव, पहाड़ी के 81, मानिकपुर के 62, रामनगर के 40 व मऊ के 56 गांव में प्रधान तो चयनित हो गए हैं, लेकिन वर्तमान बजट से काम शुरू नहीं हुआ है। हालांकि, 86 गांव में ग्राम पंचायत सदस्यों के चयन का कोरम पूरा न होने से इन गांव के प्रधान अभी शपथ ग्रहण नहीं कर सके हैं। डीपीआरओ राजबहादुर ने बताया कि कोरोना के चलते मिले सरकारी बजट का उपयोग भी नहीं हो पाया है। प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने से प्रशासक इसका संचालन कर रहे थे। कुछ ब्लाक में मनरेगा के तहत बजट खर्च हुआ है, लेकिन उनके भुगतान का काफी हिस्सा बाकी है। जिले की ऑनलाइन साइड खुल नहीं पा रही, जिससे ब्लाकवार बजट का आंकड़ा अभी उपलब्ध नहीं है। सदर ब्लाक के बीडीओ राजेश नायक ने बताया कि कोरोना के चलते ज्यादा काम का मौका ही नहीं मिला है। फिलहाल चालू वित्तीय वर्ष में मनरेगा के अलावा अन्य मद का बजट भी नहीं आया। (संवाद)
10 करोड़ के कार्य कराए, 20 करोड़ अभी खाते में
उरई (जालौन)। जिले में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की अधिसूचना के बाद गांव में विकास की कमान संभाले प्रशासकों ने 574 ग्राम पंचायतों में अब तक विकास के कार्यो ंपर करीब आठ से दस करोड़ रुपये के खर्च किए हैं। डीपीआरओ अभय यादव ने बताया कि जिले में दिसंबर से लेकर एक अप्रैल के बीच ग्राम पंचायतों में प्रशासकों ने कोई बड़ा कार्य नहीं कराया है। सभी नौ ब्लाकों में पहले से चले आ रहे कार्यों को ही पूरा कराया गया। जिनमें शौचालय, आवास, नाली निर्माण आदि के कार्य शामिल हैं। इसके अलावा कर्मचारियों का वेतन आदि भी इसी मद से दिया गया। कुल मिलाकर आठ से दस करोड़ रुपये व्यय हुए हैं। अभी भी सभी ब्लाकों की ग्राम पंचायतों के लिए करीब 20 से 25 करोड़ की धनराशि बची है, उसे नई गठित पंचायतों के खातों में डाल दिया जाएगा, जिससे कि आगे के कार्यों में किसी तरह की रुकावट न आ सके। (संवाद)
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