बांदा। खदानों की खाता-बही बालू माफियाओं और कारोबारियों की परत दर परत पोल खोल रही है। प्रशासन और पुलिस के बड़े और छोटे अफसरों से लेकर कर्मचारियों तक का मुंह बंद रखने को उन्हें हर माह दी जाने वाली रकम का खुलासा इसी बही से हुआ। यही बही (रजिस्टर) इस बात का भी सुबूत दे रही है कि खदानों में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और हाईकोर्ट के आदेशों की खुली धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। रोक के बावजूद खदानों में मशीनें धड़ल्ले से चल रहीं हैं।
खदान के रजिस्टर के पन्नों ने तमाम पोल खोली हैं। ईमानदार होने का ढिंढोरा पीटने वाले कई अफसरों को बेनकाब किया है। बालू माफिया किस अफसर को कितना देते हैं? यह उनके इस रजिस्टर में बाकायदा चढ़ा है। खदानों का हिसाब-किताब रोजाना लाखों का है। आमद और खर्च दोनों दर्ज हो रहे हैं। इसी बीच एक खदान के रजिस्टर के सोशल मीडिया में वायरल हो जाने के बाद इन सबका भंडाफोड़ हुआ है।
खदानों में जेसीबी और पोकलैंड मशीनें चल रही हैं, जबकि एनजीटी और हाईकोर्ट ने इन पर सख्ती से रोक लगा रखी है। अफसर और बालू कारोबारी इससे लगातार मुकरते रहते हैं। खदान के खर्च वाली खाता-बही में पिछले माह अक्तूबर के किसी एक दिन में पोकलैंड मशीन का खर्च 60 हजार रुपये चढ़ा है। दो घंटा 24 मिनट जेसीबी मशीन का खर्च 1920 रुपये दर्ज है। एक अन्य पन्ने में सात घंटे 18 मिनट जेसीबी चलने का भाड़ा 5750 रुपये दर्ज है। इससे साफ जाहिर होता है कि खदानों में मशीनों का इस्तेमाल धड़ल्ले से हो रहा है।
तरसूमा और दुबरिया की जब्त बालू नीलाम
बांदा। अतर्रा तहसील के तरसूमा और दुबरिया गांव में खनिज विभाग द्वारा जब्त की गई 775 घन मीटर अवैध बालू की नीलामी 10.11 लाख रुपये में कर दी गई। चंदवारा गांव के धर्मेंद्र सिंह ने यह नीलामी अपने नाम करा ली। 631 घन मीटर बालू उठाने के लिए खनिज अधिकारी ने आठ दिन की मोहलत प्रदान की है।
खनिज अधिकारी द्वारा गुरुवार को जारी अनुमति पत्र में चार शर्तें भी शामिल हैं। इसमें प्रतिदिन उठाई जाने वाली बालू की निकासी का ब्योरा दर्ज होगा। यह खनिज अधिकारी को पेश किया जाएगा। प्रपत्र सी की मूल प्रति भी खनिज कार्यालय में जमा करनी होगी। तरसूमा में 525 घन मीटर और दुबरिया में 250 घन मीटर बालू बताई गई है।
काली कमाई ‘वीआईपी’ पर भी खर्च
बांदा। बालू के काले कारोबार से कुछ ‘वीआईपी’ भी लाभान्वित हो रहे हैं। अवैध खनन से हो रही कमाई उन पर भी खर्च हो रही है। ये और कोई नहीं बल्कि खदानों के रजिस्टर बता रहे हैं। रजिस्टर में खर्च वाले लगभग हरेक पन्ने में कहीं 44 हजार तो कहीं इससे ज्यादा ‘वीआईपी’ के नाम पर चढ़ा है। उनकी गाड़ियों पर भी खर्च दिखाया गया है।
खदानों से डंप का खेल
बांदा। डंप की आड़ में खदानों से खनन का खेल हो रहा है। ट्रैक्टरों के जरिये खदानों से बालू डंप स्थल तक पहुंचाई जा रही है। वहां से यह बालू ट्रकों में लोड होकर दूर-दूर तक मुंह मांगे दामों पर बेची जा रही है। खदानों में ट्रैक्टरों के बालू ढोने का खुलासा खदान की खाता-बही ने किया है। खर्च वाले पन्नों पर यह दर्ज है। अक्तूबर के एक पन्ने में 13 ट्रैक्टरों की ढुलाई 223 रुपये की दर से 28,990 रुपये भुगतान की गई है।